



उत्तराखंड की आस्था और परंपरा से जुड़ी ऐतिहासिक नंदा देवी राजजात यात्रा को इस बार स्थगित कर दिया गया है। हर 12 साल में निकलने वाली इस यात्रा को लोक विश्वास में हिमालय महाकुंभ कहा जाता है। वर्ष 2026 में अगस्त–सितंबर के दौरान प्रस्तावित इस महायात्रा को अब अगले वर्ष आयोजित किया जाएगा। समिति ने यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया है।
नंदा देवी राजजात समिति के अनुसार, प्रस्तावित समय में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बेहद अस्थिर रहता है। भारी बर्फबारी, अचानक मौसम बदलने और दुर्गम रास्तों के कारण श्रद्धालुओं के लिए गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा को टालने का फैसला किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
चमोली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी दबाव या असहमति के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने बताया कि यात्रा स्थगित करने की औपचारिक घोषणा 23 जनवरी को नौटी गांव में आयोजित मनौती कार्यक्रम के दौरान की जाएगी।
नंदा देवी राजजात यात्रा उत्तराखंड की सबसे पवित्र और कठिन यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से विदा करने की परंपरा का प्रतीक है। करीब 280 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा 19 से 22 दिनों तक चलती है और नौटी गांव से शुरू होकर रूपकुंड के पास स्थित होमकुंड तक पहुंचती है। हर बार इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
समिति ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि नंदा देवी राजजात यात्रा और इससे जुड़े अन्य धार्मिक आयोजनों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक अलग प्राधिकरण का गठन किया जाए, ताकि भविष्य में इस ऐतिहासिक परंपरा का आयोजन और अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के अनुकूल हो सके। अब श्रद्धालुओं को इस दिव्य यात्रा में शामिल होने के लिए वर्ष 2027 तक इंतजार करना होगा।

