



उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण को लेकर सरकार ने एक अहम समयसीमा तय की है। यूसीसी के तहत 26 मार्च 2010 के बाद राज्य में संपन्न हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इन विवाहों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 26 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। यदि तय समयसीमा तक पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो संबंधित दंपतियों को जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत यह प्रक्रिया ऑफलाइन होती थी, जिसमें लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब यह पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे दंपति और गवाह घर बैठे ही आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रणाली के तहत आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के साथ वीडियो बयान की सुविधा भी दी गई है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बनी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद पिछले एक वर्ष में विवाह पंजीकरण की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। प्रतिदिन औसतन करीब 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पुराने कानून के तहत यह संख्या महज 60 से 70 के आसपास थी। इससे साफ है कि ऑनलाइन व्यवस्था ने लोगों का भरोसा बढ़ाया है और पंजीकरण की प्रक्रिया को गति दी है।
विवाह पंजीकरण के साथ-साथ यूसीसी के तहत अन्य सेवाओं का भी लोग लाभ उठा रहे हैं। इस अवधि में कई लोगों ने ऑनलाइन तलाक प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं, वहीं सहवास संबंध प्रमाणपत्र के लिए भी आवेदन सामने आए हैं। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक और कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू कर एक नई दिशा दिखाई है। इससे न केवल विवाह पंजीकरण जैसी प्रक्रियाएं सरल हुई हैं, बल्कि कानून के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। सरकार की अपील है कि जिन दंपतियों ने 26 मार्च 2010 के बाद विवाह किया है, वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अनिवार्य रूप से अपना विवाह पंजीकरण करा लें, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

