



उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों में पला-बढ़ा एक सपना आज भारतीय सैन्य अकादमी के ऐतिहासिक परेड मैदान तक पहुंच चुका है। स्पर्श सिंह देवरी की कहानी किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि वर्षों के अनुशासन, संकल्प और निरंतर प्रयास का परिणाम है।
शुरुआती पढ़ाई से ही स्पर्श पढ़ाई में अव्वल रहे। एनसीसी में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने नेतृत्व और जिम्मेदारी का मतलब समझा। दिन में पढ़ाई और गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना, तो रात में परिवार के सदस्यों को पढ़ाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। सुबह की शुरुआत बास्केटबॉल अभ्यास से होती, जिससे न केवल उनकी शारीरिक क्षमता मजबूत हुई बल्कि मानसिक दृढ़ता भी विकसित हुई। एनसीसी कैंप और एसएसबी की तैयारी ने उनके आत्मविश्वास, संवाद कौशल और नेतृत्व क्षमता को और निखारा।
ग्रेजुएशन के बाद स्पर्श को एक दूरस्थ पहाड़ी गांव में ब्रांच पोस्ट मास्टर के रूप में जिम्मेदारी मिली। उन्होंने इस भूमिका को भी एक सीख के अवसर के रूप में लिया। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने निर्णय लेने, अनुशासन और सेवा भावना को अपनी पहचान बनाया। दिनभर की जिम्मेदारियों के बाद भी उनका ध्यान अपने लक्ष्य से नहीं भटका। फिटनेस, संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास पर वे लगातार काम करते रहे।
अपने माता-पिता से मिले संस्कार, कर्तव्य, साहस और ईमानदारी, उनके हर कदम में झलकते रहे। मेहनत को आदत और आदत को ताकत में बदलते हुए स्पर्श ने खुद को उस अधिकारी के रूप में तैयार किया, जिसका सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था।
जब चयन पत्र हाथ में आया, तो वह किसी चमत्कार से कम नहीं था, लेकिन असल में यह निरंतर मेहनत का स्वाभाविक परिणाम था। अब 13 दिसंबर 2025 को स्पर्श सिंह देवरी भारतीय सैन्य अकादमी के परेड मैदान में ऑलिव ग्रीन वर्दी में कदमताल करते नजर आएंगे। यह वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि उस सम्मान का प्रतीक है जो उन्होंने अपने समर्पण और अनुशासन से अर्जित किया है।
उत्तराखंड की पहाड़ियों से आईएमए तक का यह सफर हर युवा के लिए संदेश है कि जब लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास अडिग हों, तो सफलता स्वयं कदम चूमती है।

