

ऋषिकेश। सिस्टम की लापरवाही जब किसी की जान पर बन आए, तो वह केवल ‘प्रशासनिक चूक’ नहीं बल्कि ‘मानवीय अपराध’ के समान है। ऋषिकेश में गैस आपूर्ति तंत्र की बड़ी लापरवाही और कथित कालाबाजारी का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में जहाँ पारदर्शिता का दम भरा जाता है, वहीं अंकुर गैस एजेंसी की एक ‘फर्जी’ डिलीवरी रिपोर्ट ने एक बुजुर्ग को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
बनखंडी क्षेत्र के निवासी वरिष्ठ नागरिक कमल नारायण रतूड़ी अपनी पत्नी के साथ अकेले रहते हैं। उनके बेटे शहर से बाहर नौकरी करते हैं। श्री रतूड़ी ने अंकुर गैस एजेंसी से घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराया था। 5 मार्च को उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि “आपका सिलेंडर डिलीवर हो चुका है।”
हकीकत यह थी कि सिलेंडर उनके घर पहुँचा ही नहीं। आरोप है कि उनके नाम का सिलेंडर किसी और को ‘ब्लैक’ में या मिलीभगत से बेच दिया गया। जब उन्होंने शिकायत करनी चाही, तो नियम आड़े आ गया कि अब अगला सिलेंडर 21 दिन बाद ही मिलेगा।
लापरवाही की भारी कीमत
घर में चूल्हा बुझने का संकट और सिस्टम की इस धोखाधड़ी से बुजुर्ग कमल नारायण रतूड़ी को गहरा सदमा लगा। इस भागदौड़ और मानसिक प्रताड़ना के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हिमालयन इंस्टीट्यूट, जौलीग्रांट में भर्ती कराना पड़ा।
”हमें सिलेंडर मिला ही नहीं, और मैसेज भेजकर कहा जा रहा है कि काम हो गया। अब हम खाना कैसे बनाएँ? बुजुर्गों की सुनने वाला कोई नहीं है।” — पीड़ित कमल नारायण रतूड़ी (अस्पताल से)
मौन साधे बैठा प्रशासन
हैरानी की बात यह है कि इस घटना के बाद जब गैस एजेंसी और संबंधित पूर्ति अधिकारी (Supply Officer) से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। यह अफसरों की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ आम आदमी की समस्याओं से ज्यादा जरूरी उनकी अपनी ‘धुनि’ है।
मुख्य बिंदु: व्यवस्था पर सवाल
- फर्जी डिलीवरी: बिना सिलेंडर दिए डिलीवरी का मैसेज कैसे जेनरेट हुआ? क्या यह बड़े स्तर पर हो रही कालाबाजारी का हिस्सा है?
- बुजुर्गों की सुरक्षा: अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के सरकारी दावे कहाँ हैं?
- जवाबदेही का अभाव: क्या दोषी गैस एजेंसी और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
ऋषिकेश की जनता अब प्रशासन से जवाब मांग रही है कि आखिर एक खाली सिलेंडर के लिए किसी बुजुर्ग को अपनी जान जोखिम में क्यों डालनी पड़ी?







