

ऋषिकेश: तीर्थनगरी के सीमा डेंटल कॉलेज के पास स्थित करीब 3.46 एकड़ बेशकीमती भूमि आज अखाड़ा बन गई। प्रशासन और पुलिस की टीम भारी दलबल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंची, लेकिन मंदिर समिति और अनुयायियों के कड़े विरोध के चलते कार्रवाई शुरू होने से पहले ही रुक गई।
विवाद की जड़: मालिकाना हक पर दो दावे
इस पूरी जमीन को लेकर विवाद दो पक्षों के दावों के बीच फंसा है:
- पशुपालन विभाग का पक्ष: विभाग के परियोजना निदेशक अभय कुमार गर्ग का कहना है कि यह जमीन मूल रूप से वन विभाग की है, जो पशुपालन विभाग को लीज (Lease) पर मिली हुई है। विभाग का आरोप है कि इस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है।
- वीरभद्र मंदिर समिति का पक्ष: समिति के अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत का दावा है कि यह भूमि वर्ष 1825 से मंदिर के स्वामित्व में है। उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि विभाग के पास स्वामित्व के दस्तावेज हैं तो वे सार्वजनिक करें, अन्यथा जबरन कब्जा न करें।
नोटिस पर मचा था पहले ही बवाल

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस भूमि पर वीरभद्र मंदिर के प्रबंधक राजगिरि द्वारा अतिक्रमण की बात कही गई है। प्रशासन ने 10 मार्च 2026 को 48 घंटे के भीतर कब्जा खाली करने का नोटिस जारी किया था। प्रशासन का आरोप है कि टीम जब नोटिस देने पहुंची तो महंत के अनुयायियों ने असहयोग किया, जिसके बाद नोटिस को गौशाला और सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करना पड़ा।
मौके पर क्या है स्थिति?
आज एसडीएम के आदेश पर जब टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ पहुंची, तो वहां मौजूद भीड़ ने घेराबंदी कर ली।
मुख्य बिंदु
विवरण
क्षेत्र
तिकोनिया (सीमा डेंटल कॉलेज के पास)
जमीन का आकार
3.46 एकड़
मुख्य पक्ष
प्रशासन/पशुपालन विभाग बनाम वीरभद्र मंदिर समिति
वर्तमान स्थिति
भारी विरोध के कारण कार्रवाई रुकी हुई है
फिलहाल, मौके पर कानून-व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन के अधिकारी मंदिर समिति के पदाधिकारियों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मंदिर पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।







