

उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है, जहां सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए देर रात अहम फैसले लिए। इस कार्रवाई के तहत उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशकों को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया। खास बात यह है कि ये अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार पर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन अब सरकार ने अचानक निर्णय लेते हुए उन्हें पद से हटा दिया।
प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी आदेश के बाद दोनों निगमों में नई जिम्मेदारियां भी तुरंत सौंप दी गईं, ताकि कार्य संचालन प्रभावित न हो। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की कमान अब गजेंद्र सिंह बुदियाल को सौंपी गई है, जो पहले जल विद्युत निगम में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत थे और साथ ही परिचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। वहीं उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की जिम्मेदारी अजय कुमार सिंह को दी गई है, जो निगम में पहले से परिचालन से जुड़े वरिष्ठ पद पर कार्य कर रहे थे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये व्यवस्थाएं फिलहाल अस्थायी हैं और नियमित नियुक्ति होने तक प्रभावी रहेंगी। इस फेरबदल के साथ ही उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के निदेशक परियोजना अजय कुमार अग्रवाल को भी पद से हटा दिया गया है, जबकि उनके स्थान पर अभी किसी नई नियुक्ति की घोषणा नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम की एक और अहम बात यह है कि राज्य में ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष पदों पर लगातार बदलाव हो रहे हैं। महज 18 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इससे पहले भी पावर ट्रांसमिशन से जुड़े निगम में शीर्ष स्तर पर बदलाव किया गया था। लगातार हो रहे इन फैसलों को सरकार की सख्त कार्यशैली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।
इन ताबड़तोड़ निर्णयों से यह संकेत साफ है कि सरकार अब कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर बदलाव करने से भी पीछे नहीं हट रही है।







