

ऋषिकेश/देहरादून | 29 मार्च, 2026
एस.जी.आर.आर. (SGRR) विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ और गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘आयुर्वेद फूड एंड न्यूट्रिशन फॉर लाइफस्टाइल’ (Ayurveda Food and Nutrition for Lifestyle) रहा, जिसमें डॉ. श्रीवास्तव के व्याख्यान ने वैश्विक विशेषज्ञों का ध्यान खींचा।
आहार ही है पहली औषधि: डॉ. श्रीवास्तव
अपने संबोधन में डॉ. श्रीवास्तव ने आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न होने वाली बीमारियों जैसे मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), मोटापा और हृदय रोगों के बढ़ते खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन रोगों की मुख्य जड़ असंतुलित आहार, मानसिक तनाव और प्रकृति-विरोधी जीवनशैली है।
”आयुर्वेद में आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि रोग-निवारण की प्रथम औषधि है। यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार भोजन करना शुरू कर दे, तो जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को स्वतः नियंत्रित किया जा सकता है।”
— डॉ. डी.के. श्रीवास्तव
स्वस्थ जीवन के लिए ‘त्रिसूत्रीय’ मार्ग
डॉ. श्रीवास्तव ने आयुर्वेदिक पोषण प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल देते हुए तीन मुख्य बिंदु साझा किए:
- दोषों का संतुलन: सही पोषण शरीर के दोषों को संतुलित कर आंतरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
- समग्र दृष्टिकोण: रोगों को जड़ से मिटाने के लिए केवल आहार ही नहीं, बल्कि ‘विहार’ (व्यायाम, प्राणायाम, उचित निद्रा और मानसिक संतुलन) भी अनिवार्य है।
- वैश्विक मॉडल: आयुर्वेद का वैज्ञानिक पक्ष आज पूरी दुनिया के लिए लाइफस्टाइल रोगों को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी मॉडल बन चुका है।
वैश्विक मंच पर आयुर्वेद की गूंज
सम्मेलन का भव्य शुभारंभ डॉ. डी.के. श्रीवास्तव के साथ जर्मनी से आई लिया गार्डल, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत पांडे, भारतीय चिकित्सा परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती नर्वदा गोसाई, एम्स दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रमेश लाल बिजलानी, डॉ. कंचन जोशी और डॉ. अनिल थपलियाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस सम्मेलन में जर्मनी, दुबई, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने डॉ. श्रीवास्तव के विचारों की सराहना करते हुए स्वीकार किया कि आयुर्वेद का वैश्विक प्रचार समग्र स्वास्थ्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को एक नई दिशा प्रदान करेगा।







