ऋषिकेश
जीवनभर कड़े अनुशासन और मजबूत सिद्धांतों की राह पर चलकर हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने वाले ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध शिक्षक वी. एन. कुकरेती का आज 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शैल विहार स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। जीवनभर शिक्षा के जरिए समाज को दिशा देने वाले गुरुजी मरणोपरांत भी एक अद्वितीय मिसाल कायम कर गए—उन्होंने अपना पार्थिव शरीर चिकित्सा अनुसंधान के लिए एम्स (AIIMS) ऋषिकेश को दान कर दिया।
जन्मदिन पर लिया था देहदान का संकल्प
जानकारी के अनुसार, गुरुजी ने 3 जून 2024 को अपने 88वें जन्मदिन के अवसर पर स्वेच्छा से देहदान का संकल्प लेते हुए फॉर्म भरा था। लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के प्रयासों से यह महादान संभव हो सका।
क्लब के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि गुरुजी के निधन की सूचना मिलते ही उनके अंतिम दर्शनों के लिए आवास पर पूर्व छात्रों, शिक्षकों, परिजनों और नगर के गणमान्य नागरिकों का तांता लग गया।
पूर्णानन्द घाट पर सांकेतिक अंतिम संस्कार
एम्स ऋषिकेश की टीम द्वारा पार्थिव शरीर को मेडिकल रिसर्च के लिए ले जाए जाने के बाद, पूर्णानन्द घाट पर विधि-विधान से पुतले को मुखाग्नि देकर उनका सांकेतिक अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।
34 वर्षों तक दीं सेवाएं, छोड़ा भरा-पूरा परिवार
वी. एन. कुकरेती जी ने श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज, ऋषिकेश में अंग्रेजी प्रवक्ता के रूप में लगातार 34 वर्षों तक अपनी अतुलनीय सेवाएं दी थीं। वे अपने पीछे पुत्र शैलेश कुकरेती, पुत्रियाँ भावना जोशी व उपासना बमोला तथा भाई विवेकानन्द, दिनेश व कैलाश कुकरेती समेत एक हँसता-खेलता भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
शिक्षक कुकरेती का यह अंतिम कदम समाज के लिए एक अविस्मरणीय और अनुकरणीय प्रेरणा बन गया है।

