

रामनवमी के शुभ अवसर पर राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देहरादून से पिथौरागढ़ के बीच नई विमान सेवा की शुरुआत कर दी गई। जौलीग्रांट हवाई अड्डे से शुरू हुई इस 42 सीटर उड़ान के शुरू होने के साथ ही दोनों शहरों के बीच का लंबा और कठिन सफर अब महज एक घंटे में पूरा हो सकेगा। यह सेवा न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई गति देगी।
कार्यक्रम में कहा गया कि एक समय था जब हवाई यात्रा केवल संपन्न और विशेष वर्ग तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब आम नागरिक के लिए भी उड़ान भरना आसान हो गया है। वर्ष 2016 में शुरू हुई क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना ने छोटे शहरों, दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों को देश के हवाई नेटवर्क से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे लोगों को सस्ती दरों पर हवाई सेवाएं मिल रही हैं। हाल ही में इस योजना के दूसरे चरण को मंजूरी मिलने के साथ अगले दस वर्षों में बड़े बजट के साथ नए हवाई अड्डों और हेलिपैड के विकास का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों तक तेज और सुलभ हवाई सेवाएं पहुंचाने की योजना है।
पर्वतीय राज्य के लिए हवाई सेवाएं अब केवल परिवहन का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि आपात परिस्थितियों में जीवन रेखा साबित हो रही हैं। दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने से लेकर गंभीर रोगियों को त्वरित इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक लाने में इन सेवाओं की अहम भूमिका है। वर्तमान में कई हवाई मार्गों पर उड़ानों का संचालन हो रहा है और राज्य की अपनी हवाई कनेक्टिविटी योजना के तहत भी नए मार्ग शुरू किए गए हैं। बीते वर्षों में हेलिपोर्ट और हेलीपैड की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच पहले से कहीं आसान हो गई है।
नई उड़ान सेवा शुरू होने से सीमांत जिले के लोग अब कम समय में राजधानी तक पहुंच सकेंगे, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इसी दिशा में क्षेत्रीय हवाई अड्डे के विस्तार और विकास पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में इस क्षेत्र को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्तर पर भी राज्य में हवाई सुविधाओं को बढ़ावा देने का भरोसा जताया गया और इस नई सेवा को क्षेत्रीय विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।







