


हल्द्वानी में पांच जनवरी की शाम नो-एंट्री जोन में मु
खानी–पनचक्की रोड पर एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय बच्चे की भारी वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। यह वही वाहन था, जिसे नो-एंट्री क्षेत्र में चलने की अनुमति सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और संबंधित अनुमति को तत्काल निरस्त कर दिया गया।
अनुमति रद्द होने के बाद एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की ओर से शहर में चल रहे विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर भारी वाहनों के संचालन की इजाजत मांगी गई। एडीबी ने जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली को दिन के समय नो-एंट्री जोन में चलाने की अनुमति के लिए एसपी ट्रैफिक के माध्यम से एसएसपी के समक्ष आवेदन किया, लेकिन इस बार एसएसपी ने साफ तौर पर इजाजत देने से इनकार कर दिया।
दरअसल, एडीबी की परियोजनाओं के तहत शहर में डंपर, मिक्चर, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली लगातार सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। पहले अनुमति मिलने के बाद ये भारी वाहन बेखौफ होकर नो-एंट्री जोन में भी चलने लगे थे। इसी लापरवाही का नतीजा वह दर्दनाक हादसा बना, जिसने एक मासूम की जान ले ली। हादसे के बाद ही प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की नींद टूटी और नियमों की सख्ती से समीक्षा शुरू हुई।
एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने स्पष्ट किया है कि दिन के समय नो-एंट्री जोन में ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कार्य करना ही है तो रात के समय इसकी अनुमति दी जा सकती है। वहीं, दिन में संचालन के लिए एजेंसी को पूरी टाइमिंग योजना के साथ आवेदन करना होगा, जिसमें भीड़ की स्थिति, स्कूलों का समय और यातायात का दबाव जैसे सभी पहलुओं का स्पष्ट उल्लेख हो। इन सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच के बाद ही किसी भी तरह की अनुमति पर विचार किया जाएगा।
प्रशासन का यह सख्त रुख साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि अब शहर में विकास कार्यों के नाम पर आम लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

