



माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली वसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी को पूरे श्रद्धा भाव और विशेष ज्योतिषीय योगों के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन वाणी, विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए यह दिन ज्ञान, कला और सृजन से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आईआईटी स्थित सरस्वती मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राकेश शुक्ला के अनुसार इस वर्ष वसंत पंचमी का पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग और चतुर्ग्रही योग में पड़ रहा है, जो इसे विशेष फलदायी बनाता है। चूंकि यह पर्व शुक्रवार के दिन मनाया जा रहा है, इसलिए माता सरस्वती के साथ-साथ माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होने के भी प्रबल योग बन रहे हैं। ऐसे में यह दिन विद्या, धन और समृद्धि की दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है।
वसंत पंचमी का पर्व विशेष रूप से विद्यार्थियों, व्यापारियों, कलाकारों, संगीत साधकों और सृजन से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा। शास्त्रों में इस तिथि को सिद्ध दिवस माना गया है और सामान्य परिस्थितियों में इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के विवाह सहित अनेक शुभ कार्य किए जाते हैं। हालांकि इस वर्ष शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 31 जनवरी 2026 को शुक्र ग्रह के उदय के बाद ही पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत संभव हो सकेगी।
वसंत पंचमी के दिन पूजा का सर्वोत्तम समय प्रातः लगभग 7:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। वैसे तो पूरे दिन माता शक्ति की उपासना का विधान है, लेकिन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से विशेष पुण्य और मनोकामना पूर्ति का फल मिलता है।
इस दिन माता सरस्वती की पूजा पीले रंग को विशेष महत्व देते हुए की जाती है। पीले पुष्प, पीले चावल, पीले वस्त्र और पीले मिष्ठान अर्पित कर माता का पूजन किया जाता है। मंत्र जाप, वाद्य यंत्रों की पूजा और दान करने से विद्या, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि मानी जाती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए पुस्तकों और लेखन सामग्री की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है, जिससे शिक्षा में सफलता और एकाग्रता बढ़ती है।

