


ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत कर योग और अध्यात्म की वैश्विक महत्ता पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्से युद्ध और तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में योग ही मानवता को शांति और संतुलन की राह दिखाने वाला सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल एक साधना नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता को जोड़ने वाली जीवन पद्धति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पावन धरती केवल देवभूमि के रूप में ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह योग, अध्यात्म और आयुष परंपराओं की भी महान संगम स्थली है। यहां की आध्यात्मिक विरासत और प्राकृतिक वातावरण विश्वभर से आने वाले साधकों को आत्मिक शांति और स्वास्थ्य की अनुभूति कराता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी के रूप में सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि दुनिया के विभिन्न देशों से शांति और स्वास्थ्य की खोज में आने वाले लोग यहां एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण प्राप्त कर सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड केवल देवताओं की भूमि ही नहीं, बल्कि योग और ध्यान की जन्मभूमि भी है। इसी धरती से जीवन ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह पूरी दुनिया में फैल रहा है। उन्होंने बताया कि देश में सबसे पहले योग नीति उत्तराखंड में लागू की गई थी। राज्य सरकार पांच नए योगधाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके साथ ही आयुष वेलनेस सेंटर तथा योग वेलनेस सेंटर स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से भी लोगों को आयुष सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और राज्य में एक विशेष पोर्टल के जरिए आयुष परामर्श दिया जा रहा है। सरकार योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई नई कार्य योजनाओं पर भी काम कर रही है।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की यह पावन धरा योग की अनंत परंपराओं, साधना पद्धतियों और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रही है। यहां का हर घाट, हर पर्वत और यहां बहने वाली पवित्र नदियां योग और ध्यान की साधना को और अधिक गहराई प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इस भूमि का वातावरण ही साधकों को आत्मिक अनुभूति और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करता है।
इस अवसर पर डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती ने सभी विशिष्ट अतिथियों और देश-विदेश से आए योग साधकों का परमार्थ परिवार की ओर से स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने वाला आध्यात्मिक मंच है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम या क्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। यह एक ऐसा सार्वभौमिक विज्ञान है जो मनुष्य के मन, शरीर और आत्मा के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित करता है। योग जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन का संचार करता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों और तनाव के बीच योग मन और शरीर को पूर्ण रूप से तनावमुक्त रखने का एक प्रभावी माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग के अभ्यास से न केवल एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी होता है। योग एक ऐसी शक्ति है जो जाति, भाषा, धर्म और भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर पूरी दुनिया को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करती है और मानवता को शांति और संतुलन की राह दिखाती है।







