


Uttarakhand: प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए देहदान का संकल्प लिया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने दधीचि देहदान समिति को अपना संकल्पपत्र सौंपकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि सेवा और मानवता का भाव जीवन के बाद भी कायम रह सकता है। उनके इस निर्णय को समाज में मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने इस अवसर पर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का यह संकल्प मानवता, सेवा और सामाजिक चेतना को जीवंत करता है। उन्होंने मृत्यु के उपरांत नेत्रों सहित सभी प्रत्यारोपण योग्य अंग दान करने का संकल्प लिया है, जिससे जरूरतमंद लोगों को नया जीवन और नई दृष्टि मिल सकेगी। यह कदम न केवल समाज के लिए प्रेरक है, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों की गहराई को भी दर्शाता है।
देहदान की परंपरा भारतीय संस्कृति की उस महान सोच को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर को भी समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर देता है। महर्षि दधीचि की त्याग और बलिदान की परंपरा से प्रेरित यह संकल्प चिकित्सा विज्ञान, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही नेत्रदान और अंगदान के माध्यम से अनेक ऐसे जीवन रोशन होंगे, जो आज आशा की किरण तलाश रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री का यह निर्णय निस्संदेह समाज को संवेदनशीलता, करुणा और परोपकार का गहरा संदेश देता है।

