

Uttarakhand: प्रदेश में खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट और उससे होने वाले स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। विधानसभा सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसमें सरकार ने साफ किया कि खाद्य पदार्थों में मौजूद ऐसे रसायनों की पहचान के लिए विशेष नियमावली तैयार की जाएगी जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए नियमित जांच अभियान भी चलाया जाएगा।
भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला के प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले से ही विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों के सैंपल एकत्रित कर जांच कराई जा रही है। अब सरकार ऐसी नियमावली बनाने की दिशा में काम करेगी, जिसके माध्यम से उन रसायनों को चिन्हित किया जा सकेगा जो लंबे समय में कैंसर का कारण बनते हैं।
सदन में भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने भी इस विषय पर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर त्योहारों के समय एफडीए की ओर से जांच अभियान तेज कर दिया जाता है, लेकिन मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह प्रक्रिया पूरे साल नियमित रूप से चलनी चाहिए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह सही है कि त्योहारों के समय विभाग अधिक सक्रिय रहता है, लेकिन अब सरकार ने तय किया है कि हर महीने प्रदेशभर में एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर उनकी जांच की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लगने वाले हॉट बाजारों में भी बिकने वाले खाद्य पदार्थों की सैंपल जांच की जाएगी, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच को तेज और प्रभावी बनाने के लिए देहरादून में एक आधुनिक खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। यह प्रयोगशाला 31 मार्च 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगी, जिसके बाद खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच में तेजी आएगी और रिपोर्ट समय पर मिल सकेगी।
इसके साथ ही खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को मजबूत करने के लिए सरकार ने 28 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पदों पर भर्ती का प्रस्ताव लोक सेवा आयोग को भेज दिया है। जब तक इन पदों पर स्थायी भर्ती नहीं हो जाती, तब तक अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों को तैनात करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि जांच और निरीक्षण की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय निकायों को भी खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने और निरीक्षण का अधिकार दिया जाना चाहिए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में खाद्य पदार्थों के सैंपल एफडीए द्वारा लिए जाते हैं, लेकिन निकायों को भी यह अधिकार देने के विषय में सरकार नीतिगत निर्णय लेने पर विचार करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान वर्ष 2023-24 और 2024-25 में कुल 3311 खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 330 सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें फेल पाया गया। ऐसे मामलों में संबंधित निर्माता और विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।







