


ऋषिकेश में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन किया। इस अवसर पर गुजराती भाषा में प्रकाशित ‘आरोग्य अंक’ का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहा।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि कल्याण पत्रिका केवल एक साहित्यिक प्रकाशन नहीं है, बल्कि यह पिछले सौ वर्षों से भारतीय समाज को आध्यात्मिक और वैचारिक दिशा देने वाला एक सशक्त माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने बिना किसी समझौते के सनातन परंपराओं, भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस, महाभारत, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के प्रकाशन के माध्यम से गीता प्रेस ने पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति से जोड़े रखा है।
अमित शाह ने गीता प्रेस के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’ के तपस्वी और निस्वार्थ जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा शुरू की गई यह वैचारिक यात्रा आज भी उसी निष्ठा और सात्विकता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कल्याण के विशेषांक- चाहे वे योग, श्रीकृष्ण, हिंदू संस्कृति या राष्ट्रबोध पर आधारित रहे हों- करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बने हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कल्याण पत्रिका का शताब्दी अंक सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक सदी से अधिक समय तक इस पत्रिका ने समाज को संस्कार, मूल्य और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की है, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने गीता प्रेस परिवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह संस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
कार्यक्रम में कल्याण पत्रिका के संपादक कृष्ण कुमार खेमका ने जानकारी दी कि अब तक पत्रिका की लगभग सत्रह करोड़ पचास लाख प्रतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जो इसके व्यापक प्रभाव और जनविश्वास को दर्शाता है। यह अवसर न केवल गीता प्रेस की सौ वर्षों की साधना का उत्सव था, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना के गौरवशाली सफर का भी साक्षी बना।

