

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यदि भविष्य में एलपीजी की कमी की स्थिति बनती है, तो होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कामकाज जारी रखने के लिए जलाने की लकड़ी उपलब्ध कराई जा सकती है। सरकार का मानना है कि इस वैकल्पिक व्यवस्था से कारोबारियों को संभावित संकट के दौरान राहत मिल सकेगी और उनका कामकाज पूरी तरह प्रभावित नहीं होगा।
दरअसल, हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर पैदा हुए तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे प्रभाव के कारण गैस की उपलब्धता को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयातित गैस से पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड वन विकास निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वह जरूरत पड़ने पर पर्याप्त मात्रा में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। यदि एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होती है तो यह लकड़ी होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपलब्ध कराई जा सकेगी।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एलपीजी की कमी की स्थिति में भी व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों। खासतौर पर होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसाय, जिनका कामकाज गैस पर अधिक निर्भर करता है, उन्हें इस व्यवस्था से राहत मिल सकेगी।
हालांकि अधिकारियों का यह भी कहना है कि फिलहाल घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी तरह की घबराने वाली स्थिति नहीं है। सरकार केवल एहतियात के तौर पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार कर रही है, ताकि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस की आपूर्ति पर असर पड़ता है तो राज्य में जरूरी सेवाओं और कारोबार पर इसका कम से कम प्रभाव पड़े।







