


Dehradun: स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री ने अपने कामकाज का अंदाज साफ कर दिया। पदभार मिलने के अगले ही दिन वह बिना किसी औपचारिक सूचना या प्रोटोकॉल के चुपचाप दून अस्पताल पहुंच गए। उनका उद्देश्य था जमीनी हकीकत को करीब से समझना और मरीजों की वास्तविक परेशानियों को खुद महसूस करना। इसी क्रम में वह आम मरीजों की तरह कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे, ताकि व्यवस्थाओं की सच्चाई को बिना किसी बनावटी तैयारी के देखा जा सके।
अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों की नजर जैसे ही उन पर पड़ी, उन्होंने तुरंत प्रबंधन को सूचना दी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन में अचानक हलचल मच गई और अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचने लगे। इस दौरान मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, निर्माण कार्यों और सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से सीधे संवाद करते हुए विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी ली और जहां कमियां नजर आईं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अग्निशमन से जुड़ी अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया लंबित होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और संबंधित अधिकारियों को इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल के ढांचे को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया और पोस्टमार्टम हाउस के लिए चिन्हित स्थान को मेडिकल कॉलेज को हस्तांतरित करने के निर्देश भी दिए, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
मंत्री ने चिकित्सकों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सुझाव भी मांगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि स्वास्थ्यकर्मी खुद को मरीज की स्थिति में रखकर सोचेंगे, तो सेवा की गुणवत्ता स्वतः बेहतर हो जाएगी। उनकी इस बात ने पूरे स्टाफ को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश दिया।
निरीक्षण के दौरान ऑर्थोपेडिक विभाग में ऑपरेशन को लेकर आ रही शिकायतों पर भी उन्होंने ध्यान दिया। बड़ी संख्या में मरीजों को ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। इस पर अधिकारियों ने बताया कि आवश्यक उपकरण उपलब्ध हो चुके हैं और उनकी स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होते ही ऑपरेशन की संख्या बढ़ाई जाएगी, जिससे मरीजों को राहत मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाला रहा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।







