


केदारनाथ धाम यात्रा के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित संचालन को लेकर मंगलवार को जिला कार्यालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, केदारनाथ विधायक, घोड़ा-खच्चर यूनियन, डंडी-कंडी यूनियन के प्रतिनिधि, साथ ही ऊखीमठ, गुप्तकाशी और केदारनाथ नगर पंचायत के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी यात्रा से पहले सभी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से अंतिम रूप देना और यात्रियों को सुगम एवं सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करना रहा।
बैठक के दौरान केदारनाथ धाम यात्रा की प्रारंभिक तैयारियों, आवश्यक व्यवस्थाओं, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों, बीकेटीसी, हक-हकूकधारियों और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि यात्रा शुरू होने से पहले भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में उपचारात्मक कार्य पूरे किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर रूट डायवर्जन की स्पष्ट योजना तैयार रखी जाए। इस दौरान केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि श्रद्धालु जिस गहरी आस्था और श्रद्धा के साथ बाबा केदार के दर्शन के लिए आते हैं, उसी भाव और सम्मान के साथ उन्हें दर्शन कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
यात्रा के दौरान पार्किंग व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने को लेकर भी बैठक में अहम चर्चा हुई। जिन स्थानों पर स्थानीय महिलाएं पार्किंग संचालन का कार्य कर रही हैं, वहां पार्किंग से प्राप्त होने वाली आय का पचास प्रतिशत स्थानीय समूहों को और शेष पचास प्रतिशत संबंधित प्राधिकरण को दिए जाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही गौरीकुंड में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्नान के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर भी निर्णय लिया गया।
डंडी-कंडी संचालन को लेकर सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों के समाधान पर भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया। तय किया गया कि सभी डंडी-कंडी संचालकों का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सत्यापन अनिवार्य होगा तथा उनकी सूची प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उपजिलाधिकारी ऊखीमठ की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें स्थानीय थाना प्रभारी, समाज कल्याण अधिकारी, एडीओ पंचायत और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति डंडी-कंडी पर्ची काउंटर के लिए ऐसे उपयुक्त स्थानों का चयन करेगी, जिससे भीड़ की समस्या न हो और श्रद्धालुओं को असुविधा न झेलनी पड़े।
घोड़ा-खच्चर संचालन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। यात्रा शुरू होने से पहले मार्गों पर बैरिकेडिंग की जाएगी, ताकि बिना पंजीकरण वाले घोड़ा-खच्चर यात्रा मार्ग में प्रवेश न कर सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि पंजीकरण में जनपद के घोड़ा-खच्चर संचालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही पशुपालन विभाग को निर्देश दिए गए कि सभी घोड़ा-खच्चरों का बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाए, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पुलिस विभाग को सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने, मोबाइल चोरी जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करने और टेंटों में ठहरने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वच्छता के तहत सुलभ शौचालयों में सफाई कर्मियों की तैनाती और महिला शौचालयों में सेनेटरी पैड डिस्पोजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। ठंड से बचाव के लिए घोड़ा पड़ावों, रेन शेल्टर और अन्य प्रमुख स्थलों पर अलाव की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सोनप्रयाग से ऊपर के क्षेत्र में मांस, शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री और सेवन पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का साफ संदेश है कि केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था, सुरक्षा और सुविधा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

