

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के शिवाजी नगर, 20 बीघा और बापूग्राम जैसे इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर जहां सिर पर घर उजड़ने की तलवार लटकी है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है। हाल ही में हुई दो दिनों की भारी बारिश ने क्षेत्र की सड़कों को तालाब और दलदल में तब्दील कर दिया है।
सीवर लाइन के गड्ढे बने मुसीबत की जड़
शिवाजी नगर की मुख्य समस्या कुछ महीनों पहले शुरू हुई सीवर लाइन परियोजना से जुड़ी है। सीवर पाइप डालने के लिए सड़कों को खोदा गया था, लेकिन काम पूरा होने और पैच वर्क (सड़क मरम्मत) शुरू होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट का वन भूमि प्रकरण पर बड़ा आदेश आ गया। इस आदेश के बाद वन भूमि क्षेत्र में पड़ने वाले इन इलाकों में सभी प्रकार के विकास कार्यों और फंड के इस्तेमाल पर रोक लग गई।
हादसों को दावत देती ‘फिसलन भरी’ सड़कें
बारिश के बाद खोदी गई सड़कों की मिट्टी अब जानलेवा कीचड़ में बदल चुकी है। स्थानीय निवासियों के अनुसार:
- सड़कों का धंसना: सड़कों के धंसने से आए दिन वाहनों के पहिये गड्ढों में फंस रहे हैं।
- फिसलन का खतरा: चिकनी मिट्टी पर दुपहिया वाहन सवार लगातार फिसल रहे हैं, जिससे कई लोग चोटिल हो चुके हैं।
- पैदल चलना दुश्वार: बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए इन रास्तों से निकलना किसी जोखिम से कम नहीं है।
दोहरी मार झेल रही जनता
स्थानीय निवासी इस स्थिति को ‘दोहरी मार’ बता रहे हैं। उनका कहना है कि वे एक तरफ अपने आशियाने को बचाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन की बेबसी उन्हें कीचड़ और गंदगी के बीच रहने को मजबूर कर रही है। यही हाल मीरा नगर और बापूग्राम का भी है, जहां विकास कार्य ठप्प होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
बजट और आदेश के बीच बंधे जनप्रतिनिधियों के हाथ
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधि भी चिंतित हैं, लेकिन कोर्ट के कड़े रुख और फंड पर लगी रोक ने उनके हाथ बांध दिए हैं। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जब तक कोर्ट की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या राहत नहीं मिलती, तब तक वन भूमि क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण या मरम्मत कार्य करना कानूनन संभव नहीं है।
“हमारा जीना मुहाल हो गया है। न सड़क ठीक हो रही है और न ही भविष्य का पता है। क्या प्रशासन हमारे जख्मों पर मरहम लगाने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं निकाल सकता?”
— एक स्थानीय निवासी का दर्द







