

ऋषिकेश के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर आज उस समय हड़कंप मच गया जब सूचना मिली कि पहाड़ों में भारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, जल्द ही स्पष्ट हो गया कि यह जिला प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित एक मॉक ड्रिल (Mock Drill) थी।
चारधाम यात्रा और आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर आज ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर जिला प्रशासन और विभिन्न आपदा राहत बलों ने संयुक्त मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया। एसडीएम योगेश मेहरा के नेतृत्व में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों के रिस्पांस टाइम (Response Time) और कार्य कुशलता को जांचना था।
मॉक ड्रिल का घटनाक्रम: जब गंगा में बहने लगे 6 लोग
अभ्यास की शुरुआत जिला आपदा केंद्र से मिली एक सूचना के साथ हुई, जिसमें बताया गया कि ऊपरी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।
- तत्काल कार्रवाई: सूचना मिलते ही पुलिस, तहसील प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं।
- घाट खाली कराना: त्रिवेणी घाट पर भगदड़ जैसी स्थिति के बीच प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए पूरे क्षेत्र को खाली कराया।
- साहसिक रेस्क्यू: अभ्यास के दौरान यह स्थिति पैदा की गई कि 6 लोग गंगा की तेज धारा में बह रहे हैं। जल पुलिस, SDRF और NDRF की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पानी के बीच से सभी को सकुशल रेस्क्यू कर बाहर निकाला।
क्यों जरूरी था यह अभ्यास?
एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि इस मॉक ड्रिल के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
-
- टूरिस्ट सीजन: वर्तमान में पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
- चारधाम यात्रा: जल्द ही यात्रा शुरू होने वाली है, जिससे घाटों पर भीड़ बढ़ेगी।
- कुंभ 2027: आगामी कुंभ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को अभी से पुख्ता करने के निर्देश मिले हैं।
भागीदार विभाग और उनकी भूमिका
विभाग/इकाई
मुख्य भूमिका
तहसील व जिला प्रशासन
समन्वय और आदेश (कमान एसडीएम के पास)
SDRF / NDRF / जल पुलिस
गंगा की लहरों के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन
वन विभाग
आपदा के दौरान मैदानी और तटीय सहायता
स्वास्थ्य विभाग (स्थानीय टीम)
घायलों को प्राथमिक चिकित्सा और एम्बुलेंस सहायता
एसडीएम योगेश मेहरा का बयान: “मॉक ड्रिल के माध्यम से सभी विभागों की कार्य दक्षता परखी गई है। फिलहाल सभी का रिस्पांस टाइम और समन्वय संतोषजनक पाया गया है। आपदा की स्थिति में कम से कम समय में जान-माल की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है।”







