

उत्तराखंड विधानसभा में जौनसार-बाबर क्षेत्र के लोगों को हकहकूक के रूप में मिलने वाली लकड़ी का मुद्दा उठा, जिस पर सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। सदन में संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के हकहकूकधारियों को लकड़ी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है और जो भी बैकलॉग बना हुआ है, उसे जल्द पूरा किया जाएगा।
सदन में चकराता से विधायक प्रीतम सिंह ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि जौनसार-बाबर क्षेत्र के लोगों को परंपरागत अधिकारों के तहत लकड़ी मिलती है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि वन विकास निगम को जो लकड़ी दी जाती है, उससे पहले स्थानीय हकहकूकधारियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उसके बाद बची हुई लकड़ी वन विकास निगम को दी जाए।
इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लकड़ी वितरण की एक तय सीमा निर्धारित है, जिसका पालन किया जाता है। उन्होंने बताया कि हकहकूक के तहत गढ़वाल मंडल में 13,033 घन मीटर और कुमाऊं मंडल में 16,460 घन मीटर लकड़ी वितरित की जाती है। इसके अतिरिक्त 2,560 घन मीटर लकड़ी वन्य जीव क्षेत्र से भी उपलब्ध कराई जाती है।
सुबोध उनियाल ने कहा कि हकहकूकधारियों को लकड़ी देने की प्रक्रिया लगातार जारी है और जिन लोगों को पिछले वर्षों में लकड़ी नहीं मिल पाई है, उनके लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि परंपरागत अधिकारों के तहत क्षेत्र के लोगों को उनका हक समय पर मिले और जो बैकलॉग बना है, उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।







