

उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में इस बार का बजट सत्र कई मायनों में खास रहा। पहली बार ऐसा हुआ जब राज्यपाल के अभिभाषण के दिन ही सदन में बजट पेश किया गया। यह भी पहला अवसर था जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं वित्त मंत्री की भूमिका निभाते हुए सदन में अपनी सरकार का बजट प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री धामी ने लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया, जो पिछले बजट की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक है। चुनावी वर्ष में पेश किए गए इस बजट में सरकार ने गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के सशक्तीकरण को प्रमुख प्राथमिकता दी है।
इस बार के बजट की एक खास बात जेंडर बजट में की गई बढ़ोतरी भी रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां जेंडर बजट के लिए 16,961.32 करोड़ रुपये का प्रावधान था, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर 19,692.02 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना राज्य के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और बेटियों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और परियोजनाओं के लिए भी बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। आगामी कुम्भ मेले की तैयारियों के लिए भारत सरकार से अवस्थापना अनुदान के रूप में 1027 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 705.25 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्भया फंड के लिए 112.02 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अवस्थापना विकास हेतु 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए भी बजट में राशि निर्धारित की गई है। साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 15 करोड़ रुपये और इमरजिंग टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्रियान्वयन के लिए 10.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन के विकास, नदी तट विकास परियोजनाओं, पुस्तकालय निर्माण, न्याय पंचायत स्तर पर स्टेडियम निर्माण, नशा मुक्ति केंद्रों और रेस्क्यू सेंटर जैसी कई योजनाओं के लिए भी अलग-अलग राशि तय की गई है।
गरीब कल्याण के क्षेत्र में भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अन्नपूर्ति योजना के लिए 1300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 298.35 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 (शहरी) के लिए 56.12 करोड़ रुपये रखे गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास के लिए 25 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने के लिए 42 करोड़ रुपये और गरीब परिवारों को रसोई गैस पर सब्सिडी देने के लिए 43.03 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दिव्यांगजनों के लिए विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 167.05 करोड़ रुपये और आपदाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि भी बजट में रखी गई है।
किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भी कई योजनाओं के लिए धनराशि निर्धारित की गई है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मिशन एप्पल, दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना, मिलेट मिशन और मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। किसान पेंशन योजना और स्थानीय फसलों को बढ़ावा देने के कार्यक्रमों के लिए भी बजट में राशि तय की गई है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।
युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पलायन रोकथाम योजना के लिए 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए 62.29 करोड़ रुपये और गैर-सरकारी महाविद्यालयों को सहायता अनुदान के रूप में 155.38 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा सीएम युवा भविष्य निर्माण योजना और शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए भी बजट में राशि तय की गई है।
महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए भी सरकार ने कई योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है। नन्दा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, पोषण योजनाओं को बढ़ावा देने और प्रसूताओं को सहायता देने के लिए भी कई योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण और गंगा गाय महिला डेयरी विकास योजना के लिए भी अलग से धनराशि रखी गई है।
इधर बजट सत्र के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। गैरसैंण में आयोजित इस सत्र के पहले दिन उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने स्थायी राजधानी, अंकिता भंडारी हत्याकांड समेत अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। दिवालीखाल क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विधानसभा घेराव की कोशिश की। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देकर विधानसभा परिसर तक पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस ने करीब 10 से 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई और हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को पानी की बौछार का सहारा लेना पड़ा।
वहीं बजट सत्र शुरू होते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ विरोध जताया। कांग्रेस विधायकों ने बजट सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। सत्र शुरू होने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए। हंगामे के बीच ही राज्यपाल का संबोधन शुरू हुआ, लेकिन विरोध जारी रहने के कारण कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इस तरह बजट सत्र के पहले ही दिन सदन के अंदर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज नजर आईं।







