

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपनी सरकार का विजन रखा। सदन को संबोधित करते हुए सीएम ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मंत्र पर काम कर रही है और देवभूमि के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कड़े फैसलों से संवरेगा प्रदेश का भविष्य
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले चार वर्षों के कार्यकाल को ‘निर्णायक’ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के हित में सरकार ने कई ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाए हैं।
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सख्त कानून: धर्मांतरण विरोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे कड़े प्रावधानों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि युवाओं के भविष्य और प्रदेश की संस्कृति की रक्षा के लिए ये कदम अनिवार्य थे।
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अतिक्रमण पर प्रहार: देवभूमि के स्वरूप को बिगाड़ने वाले अवैध कब्जों और जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Change) की कोशिशों पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।
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भविष्य की रणनीति: उन्होंने आगाह किया कि आने वाले समय में भी राज्य की अस्मिता बचाने के लिए यदि और कड़े फैसले लेने पड़े, तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।
विकास की उपलब्धियां और भावी योजनाएं
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रमुख उपलब्धियों और नीतियों का खाका भी पेश किया:
| क्षेत्र | प्रमुख बिंदु |
| अर्थव्यवस्था | उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए ‘सशक्त उत्तराखंड @25’ का लक्ष्य। |
| पर्यटन व धर्म | चारधाम यात्रा के सुदृढ़ीकरण और ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के जरिए कुमाऊं में पर्यटन विस्तार। |
| महिला सशक्तिकरण | सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30% क्षैतिज आरक्षण का लाभ। |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का जाल और होमस्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती।
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“हमारा लक्ष्य केवल सत्ता चलाना नहीं, बल्कि एक ऐसे उत्तराखंड का निर्माण करना है जो अपनी परंपराओं पर गर्व करे और आधुनिकता में भी अग्रणी हो। देवभूमि का स्वरूप बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि सरकार आने वाले समय में विकास के साथ-साथ ‘सांस्कृतिक संरक्षण’ और ‘अनुशासन’ पर और अधिक ध्यान केंद्रित करेगी। विपक्षी दलों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने इसे राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप बताया।







