

उत्तराखंड में निर्मित 40 दवाओं के सैंपल केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की लैब में किए गए परीक्षण में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण फेल पाए गए हैं। जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि इनमें से कई दवाइयाँ मरीजों के स्वास्थ्य के लिए संभवतः खतरनाक हो सकती हैं।
इन फेल सैंपलों में हरिद्वार स्थित 13 कंपनियों के 32 सैंपल भी शामिल हैं। परीक्षण में पाया गया कि कुछ दवाओं के निर्माण में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण ये दवाइयाँ उचित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करतीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की दवाइयाँ लाभ पहुँचाने के बजाय मरीजों के लिए हानिकारक और गंभीर परिस्थितियों में जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
जाँच में फेल हुए सैंपलों में उन दवाओं को शामिल किया गया है, जो आमतौर पर छाती के संक्रमण, टाइप‑2 मधुमेह, गर्भावस्था में मधुमेह, एसिडिटी और पाचन समस्याओं, आंखों में एलर्जी, छींक, सर्दी-जुकाम, बुखार, श्वसन एलर्जी, बैक्टीरियल संक्रमण, अवसाद और दर्द जैसी बीमारियों के इलाज में उपयोग होती हैं।
औषधि निरीक्षक अनिता भारती ने बताया कि जांच में फेल हुई दवाओं के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश संबंधित कंपनियों को जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन दवाओं की सरकारी अस्पतालों में कितनी मात्रा में सप्लाई हुई है और उनकी रोकथाम की दिशा में सतत निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और गुणवत्ता युक्त दवाओं का ही उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध दवा के सेवन से बचें।







