

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय (एसडीएसयूवी) का छठा दीक्षांत समारोह शुक्रवार को भव्य और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 20,664 छात्र-छात्राओं को स्नातक एवं परास्नातक की उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 83 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जिनमें 59 छात्राएं शामिल रहीं। बेटियों की यह शानदार उपलब्धि समारोह का सबसे प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण क्षण बनकर उभरी।

पं. ललित मोहन शर्मा परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षांत समारोह की शुरुआत वैदिक स्वस्ति वाचन के साथ हुई। इसके बाद मुख्य अतिथि एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, कुलपति प्रो. एन. के. जोशी और कुलसचिव दिनेश चंद्र ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। अतिथियों का पारंपरिक ढोल-दमाऊ की थाप पर आत्मीय स्वागत किया गया, वहीं उत्तराखंड पुलिस बैंड ने भी अपनी प्रस्तुति से समारोह की शोभा बढ़ाई।
राज्यपाल ले. जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह ने मंच से छात्र-छात्राओं को उपाधियां और स्वर्ण पदक वितरित किए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह विशेष गर्व का विषय है कि विश्वविद्यालय की बेटियों ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम की है। 83 स्वर्ण पदकों में से 59 पदक छात्राओं द्वारा अर्जित किया जाना न केवल विश्वविद्यालय, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण है।
राज्यपाल ने कहा कि आज की बेटियां आत्मनिर्भर, सशक्त और राष्ट्र निर्माण की अग्रदूत बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि एसडीएसयूवी आज 236 संबद्ध संस्थानों और 80 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा अब तक 67 पेटेंट प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिनमें से 17 को स्वीकृति भी मिल चुकी है, जो शोध और नवाचार की दिशा में उसकी मजबूत पहचान को दर्शाता है।

इस अवसर पर परिसर निदेशक प्रो. महावीर सिंह रावत, कुलसचिव दिनेश चंद्रा, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति डॉ. यू. एस. रावत, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. के. त्रिपाठी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम. एस. एम. रावत, प्रो. मंजुला राणा सहित अनेक शिक्षाविद् और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. प्रीति खंडूड़ी द्वारा किया गया।







