

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने बुधवार को हरिद्वार प्रेस क्लब में आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए उसके ऐतिहासिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक योगदान पर विस्तार से अपने विचार रखे। समारोह में मौजूद पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्षों तक निरंतर सक्रिय रहना उसकी गहराई, प्रतिबद्धता और समाज के प्रति समर्पण का सशक्त प्रमाण है।
उन्होंने ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन से आरंभ हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल समाचारों के प्रसार का माध्यम नहीं रही, बल्कि राष्ट्र चेतना के जागरण की एक मजबूत आवाज बनी। हिंदी पत्रकारिता ने समाज को दिशा देने, जनमानस को जागरूक करने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि यह भारत की भावनाओं, संस्कृति, परंपराओं और आत्मा की सजीव अभिव्यक्ति है।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में हिंदी पत्रकारिता की मूल आत्मा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पत्रकारिता सत्य, विवेक और नैतिक मूल्यों के साथ सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखती है और हमेशा जनहित को केंद्र में रखती है। यही गुण लोकतंत्र की वास्तविक चेतना को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल सत्ता परिवर्तन की घटना नहीं थी, बल्कि यह सभ्यता के पुनर्जागरण और नवभारत के निर्माण का एक व्यापक संकल्प था। इस संकल्प को आगे बढ़ाने और उसे जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका हमेशा अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरक रही है।







