

उत्तराखंड: झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सत्ता के गलियारों में भी अपनी अच्छी पहचान बना चुका था। वह एक साल से ज्यादा समय तक उत्तराखंड में अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। इस दौरान उसने कई जनप्रतिनिधियों और बड़े अधिकारियों से दोस्ती कर ली थी। इसी वजह से झारखंड से आए इस गैंगस्टर को उत्तराखंड में सुरक्षित ठिकाना मिल गया और वह स्टोन क्रशर और प्रॉपर्टी के कारोबार में भी उतर गया।
सोशल मीडिया पर सामने आए पुराने किस्से
राजपुर रोड स्थित एक मॉल में हुई हत्या के बाद जैसे ही विक्रम की असली पहचान सामने आई, सोशल मीडिया पर उसके पुराने फोटो और किस्से वायरल होने लगे। इन तस्वीरों में वह कई नेताओं और अधिकारियों के साथ नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, झारखंड में पुलिस से बचने के लिए विक्रम करीब 15 साल पहले ही उत्तराखंड आ गया था।
रसूखदारों से बढ़ाया मेलजोल
जानकारी के मुताबिक, साल 2015 से पहले ही उसने उत्तराखंड में अपने पैर जमा लिए थे। यहां अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उसने सबसे पहले बड़े और रसूखदार लोगों से दोस्ती बढ़ाई। उसकी असली सच्चाई साल 2017 में सामने आई, जब झारखंड पुलिस ने देहरादून में छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया। तब पता चला कि वह करीब 10 साल से देहरादून में रह रहा था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर कई नेताओं और अफसरों के साथ उसकी तस्वीरें भी मिली हैं।
देहरादून से हुई थी गिरफ्तारी
विक्रम शर्मा को 13 अप्रैल 2017 को देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर ले जाया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह साल 2017 से 2021 तक जेल में बंद रहा।
भाई से विवाद बना हत्या की वजह?
पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड की वजह विक्रम शर्मा और उसके छोटे भाई अरविंद शर्मा के बीच चल रहा विवाद हो सकता है। दोनों भाइयों के बीच बाजपुर स्थित स्टोन क्रशर को लेकर लंबे समय से तनातनी चल रही थी। यह स्टोन क्रशर साल 2014 से चल रहा था। पहले इसे अरविंद शर्मा चला रहा था और उसने इसे लीज पर दे रखा था। करीब दो-तीन साल पहले हुए आपसी बंटवारे के बाद से इसका संचालन विक्रम शर्मा कर रहा था। हत्या के बाद विक्रम के पैतृक गांव पिपलिया में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
इंटेलिजेंस की बड़ी चूक पर जांच होगी
कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा सालों तक देहरादून के पॉश इलाके में रहता रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस घटना के बाद पुलिस की खुफिया व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में राजीव स्वरूप (आईजी गढ़वाल रेंज) ने सख्त रुख अपनाया है और जिला पुलिस से तुरंत रिपोर्ट मांगी है।
प्रॉपर्टी डीलरों का डेटा तैयार होगा
आईजी राजीव स्वरूप ने कहा है कि अब शहर में कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े सभी लोगों की जांच की जाएगी। उनका पूरा डेटा तैयार किया जाएगा। अगर कोई अपराधी इन धंधों की आड़ में छिपा मिला, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
झारखंड पुलिस से मांगी गई मदद
मारा गया विक्रम शर्मा झारखंड का हिस्ट्रीशीटर अपराधी था। उसके पुराने दुश्मनों और हत्या में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने झारखंड पुलिस से मदद मांगी है। एक पुलिस टीम झारखंड भी भेजी गई है। शुक्रवार देर रात तक हत्यारों का कोई सुराग नहीं लग पाया था।







