

ऋषिकेश: उत्तराखंड शासन ने भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली में लापरवाही के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त करते हुए ऋषिकेश के सब-रजिस्ट्रार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की रिपोर्ट के बाद हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

औचक निरीक्षण में खुला ‘खेल’
यह पूरी कार्रवाई पिछले माह जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा ऋषिकेश रजिस्ट्रार कार्यालय में मारे गए औचक छापे का परिणाम है। जनता की शिकायतों के बाद किए गए इस निरीक्षण में कार्यालय के भीतर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का जो मंजर दिखा, उसने विभाग की कार्यशैली की कलई खोल दी थी।
जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं:
जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में निम्नलिखित चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
स्टाम्प चोरी: औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंडों की रजिस्ट्री आवासीय दरों पर की जा रही थी, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया।
फर्जी कार्मिक की तैनाती: सरकारी दफ्तर में एक बाहरी व्यक्ति (फर्जी कार्मिक) काम करता पाया गया, जो पूरी तरह अवैध है।
नियमों की धज्जियां: सब-रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में एक लिपिक अवैध रूप से रजिस्ट्री की कार्यवाही निपटा रहा था।
दस्तावेजों में हेरफेर: नियमानुसार 3 दिन के भीतर मिलने वाले मूल अभिलेख सालों से अलमारियों में धूल फांक रहे थे। सैकड़ों दस्तावेज महीनों से लंबित रखे गए थे।
“जनता का उत्पीड़न और राजस्व की हानि किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा, उस पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
— सविन बंसल, जिलाधिकारी
मुख्यालय से संबद्ध किए गए अधिकारी
निलंबन की अवधि के दौरान सब-रजिस्ट्रार को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। शासन के इस कड़े कदम ने साफ संकेत दे दिया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।







