

ऋषिकेश/लक्ष्मणझूला: नीलकंठ महादेव के दर्शन कर लौट रहे हरियाणा के पाँच श्रद्धालुओं के लिए रविवार की शाम किसी दुस्वप्न से कम नहीं रही। रास्ता भटकने के कारण ये युवक राजाजी नेशनल पार्क के उस संवेदनशील इलाके में जा पहुँचे, जो खूंखार वन्यजीवों और हाथियों के लिए जाना जाता है। हालांकि, लक्ष्मणझूला पुलिस और वन विभाग की मुस्तैदी ने एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया।
कैसे भटके रास्ता?
मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा से आए पाँचों युवक नीलकंठ महादेव मंदिर में मत्था टेकने के बाद पैदल मार्ग से वापस ऋषिकेश लौट रहे थे। इसी दौरान शॉर्टकट लेने या रास्ते के भ्रम में वे मुख्य मार्ग से हटकर राजाजी नेशनल पार्क की सीमा के भीतर गहरे जंगल में दाखिल हो गए। शाम ढलते ही जंगल में अंधेरा छा गया और युवक पूरी तरह दिशाहीन हो गए।
संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
जब युवकों को अपनी गलती का अहसास हुआ और चारों तरफ जंगली जानवरों की आवाजें सुनाई देने लगीं, तो उन्होंने घबराकर आपातकालीन नंबर पर सूचना दी।
तत्काल कार्रवाई: सूचना मिलते ही थाना लक्ष्मणझूला पुलिस और वन विभाग की टीम ने एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
लोकेशन ट्रैक: मोबाइल नेटवर्क की मदद से उनकी अनुमानित लोकेशन निकाली गई।
कड़ी मशक्कत: यह क्षेत्र ‘हाथी कॉरिडोर’ और गुलदारों (तेंदुओं) की मौजूदगी के कारण बेहद खतरनाक माना जाता है। टीम ने टॉर्च और शोर मचाते हुए करीब 2-3 घंटे की मशक्कत के बाद पांचों को ढूंढ निकाला।
सुरक्षित रेस्क्यू और हिदायत
पुलिस टीम ने सभी पांचों युवकों को सुरक्षित जंगल से बाहर निकाला और लक्ष्मणझूला थाने लेकर आई। युवकों की पहचान हरियाणा निवासी के रूप में हुई है। पूछताछ और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
प्रशासन की अपील: > “श्रद्धालु केवल निर्धारित रास्तों का ही प्रयोग करें। शॉर्टकट के चक्कर में प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में न घुसें, क्योंकि यह न केवल कानूनी अपराध है बल्कि जानलेवा भी हो सकता है।”







