


उत्तराखंड: आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए बीआरओ का ‘प्रोजेक्ट हीरक’ लगातार काम कर रहा है। इस क्षेत्र में तापमान माइनस 14 डिग्री तक गिर जाता है और हिमस्खलन का खतरा भी बना रहता है, बावजूद इसके जवान और कर्मचारी बर्फ हटाने में जुटे हैं।
बर्फ हटाने का काम

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बीआरओ की टीम 5 फीट तक जमी बर्फ को हटाने और कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए काम कर रही है। भारी बर्फबारी और लगातार होने वाले हिमस्खलन के बीच टीमें दिन-रात बर्फ हटाने के अभियान में लगी हुई हैं। बीआरओ अधिकारियों के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाके में मशीनरी की तैनाती, जोखिम भरे ढलानों पर स्नो-कटिंग और मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद मार्ग को सुरक्षित बनाना प्राथमिकता है।
आदि कैलाश का महत्व

आदि कैलाश को ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है। यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी क्षेत्र में स्थित है और हिंदू श्रद्धालुओं के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस दुर्गम यात्रा पर निकलते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, जिससे स्थानीय लोग और यात्री दोनों कठिनाइयों का सामना करते हैं।
प्रोजेक्ट ‘हीरक’ क्या है?

‘प्रोजेक्ट हीरक’ के तहत बीआरओ इंजीनियर और श्रमिक दिन-रात बर्फ हटाकर सड़क चालू करने में लगे हैं। कई स्थानों पर बर्फ की मोटाई कई फीट तक है। पहाड़ी ढलानों से अचानक हिमस्खलन का खतरा भी बना रहता है। उद्देश्य केवल सड़क खोलना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करना है।
सामरिक और सामाजिक महत्व
यह मार्ग सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत-चीन सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों को जोड़ता है। सड़क खुलने से तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलेगी। सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों को आवश्यक वस्तुओं और आपातकालीन सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
बीआरओ का संदेश

कठोर मौसम के बावजूद ‘प्रोजेक्ट हीरक’ की टीमें लगातार काम कर रही हैं। बीआरओ ने कहा है कि उनका लक्ष्य जल्द से जल्द मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और चालू करना है, ताकि आगामी यात्रा सत्र से पहले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।







