


हरिद्वार। देवभूमि की वन संपदा को वनाग्नि से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। आगामी फायर सीजन की तैयारियों को परखने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में बुधवार, 18 फरवरी 2026 को मनसा देवी की चुनौतीपूर्ण पहाड़ियों पर एक वृहद ‘फायर मॉक ड्रिल’ का सफल आयोजन किया गया।
सुबह 10:30 बजे गूंजा सायरन, शुरू हुआ मिशन

अभ्यास की शुरुआत सुबह 10:30 बजे हुई, जब आपदा कंट्रोल रूम को मनसा देवी पहाड़ी पर भीषण आग लगने की सूचना मिली। जिलाधिकारी के निर्देश मिलते ही आपदा प्रबंधन टीम, वन विभाग, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और दमकल विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। सूचना के मात्र 5 मिनट के भीतर सभी टीमें घटनास्थल पर तैनात हो गईं, जो प्रशासन की त्वरित कार्यक्षमता को दर्शाता है।
घायलों का रेस्क्यू और वन्यजीवों की सुरक्षा
मॉक ड्रिल के दौरान एक वास्तविक आपातकालीन स्थिति का दृश्य बनाया गया:
मानवीय रेस्क्यू: आग की चपेट में आने से तीन लोग घायल हुए। आपदा प्रबंधन टीम ने दुर्गम पहाड़ी से इनका सफल रेस्क्यू किया। दो आंशिक घायलों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक गंभीर घायल को हायर सेंटर रेफर करने का अभ्यास किया गया।
वन्यजीव सुरक्षा: इस काल्पनिक घटना में एक चीतल शावक भी झुलस गया, जिसे तत्काल प्राथमिक उपचार देकर चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भेजा गया।
समय सीमा: संयुक्त टीमों के प्रभावी समन्वय के चलते 1 घंटा 45 मिनट के भीतर वनाग्नि पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
दो दिवसीय विशेष अभ्यास का समापन
प्रभागीय वनाधिकारी/इंसीडेंट कमांडर ने बताया कि यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया था:
टेबल टॉप एक्सरसाइज (17 फरवरी): रानीपुर वन विश्राम गृह में सभी 11 विभागों के अधिकारियों ने रणनीति बनाई और अपनी जिम्मेदारियां तय कीं।
फायर मॉक ड्रिल (18 फरवरी): आज धरातल पर उन रणनीतियों का सजीव परीक्षण किया गया।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण अभ्यास में राजाजी पार्क के वार्डन अजय लिंगवाल, जिला शिक्षा अधिकारी अमित चंद, सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत और एसडीओ वन विभाग पूनम कैथोला सहित स्वास्थ्य, जल संस्थान, लोनिवि और जिला पूर्ति विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

जिलाधिकारी का संदेश: वनाग्नि से निपटने के लिए विभागों के बीच आपसी तालमेल सबसे जरूरी है। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य कम से कम समय में जान-माल और वन संपदा की रक्षा करना है।







