

उत्तराखंड में अगले साल 9 से 28 फरवरी के बीच जनगणना होनी है। लेकिन राज्य के कुछ खास इलाकों में यह जनगणना फरवरी से पहले ही सितंबर महीने में कराई जाएगी। इनमें बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दरअसल, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में सर्दियों के समय भारी बर्फबारी होती है। फरवरी महीने में इन जगहों पर लोग नहीं रहते और नीचे के इलाकों में चले जाते हैं। अगर उस समय जनगणना कराई जाती, तो कई घर खाली मिलते और सही आबादी का आंकड़ा नहीं मिल पाता।

जनगणना विभाग ने ऐसे 131 गांवों और 3 कस्बों को चिन्हित किया है, जहां सर्दियों में लोग नहीं रहते। ये गांव मुख्य रूप से पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में हैं। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इन इलाकों में सितंबर 2026 में जनगणना कराई जाएगी, ताकि वहां रहने वाले लोगों की सही संख्या दर्ज की जा सके। उन्होंने कहा कि अगर फरवरी में जनगणना होती, तो बड़ी संख्या में लोग बाहर होने के कारण असली आंकड़े नहीं मिल पाते।
जनगणना में लगेंगे 34 हजार कर्मचारी:
पूरे उत्तराखंड में जनगणना के लिए करीब 34 हजार सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इनमें शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, राजस्व कर्मचारी और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे। सभी को पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि सही तरीके से जानकारी इकट्ठा की जा सके।
प्रशासन का कहना है कि पहाड़ी और दूर-दराज के गांवों में जनगणना करना काफी मुश्किल होता है। कई जगहों पर पैदल लंबा सफर तय करना पड़ता है। इसलिए मौसम को ध्यान में रखते हुए सितंबर का समय चुना गया है। सरकार का दावा है कि इस बार जनगणना आधुनिक तकनीक की मदद से की जाएगी, जिससे आंकड़े ज्यादा सही मिलेंगे और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से बनाया जा सकेगा।







