




उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन को लेकर अब सख्त व्यवस्था लागू की जा रही है। एक अप्रैल से प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियम प्रभावी होंगे, जिनके तहत घरों और संस्थानों में अब केवल दो नहीं बल्कि चार अलग-अलग रंग के कूड़ेदान रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कचरे को शुरुआत से ही अलग-अलग श्रेणियों में बांटना है ताकि निस्तारण और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। सरकार ने सभी शहरी और ग्रामीण निकायों को निर्देश दिए हैं कि इस नियम को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए और कहीं भी लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
नई व्यवस्था के तहत कचरे को गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक और स्वच्छता से जुड़े अपशिष्ट जैसी अलग-अलग श्रेणियों में बांटना होगा। इससे न केवल सफाई व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और पंचायतों को दी गई है, जबकि निगरानी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी संस्थाओं द्वारा की जाएगी। यदि निर्धारित समय पर योजना लागू नहीं की गई या गलत जानकारी दी गई तो जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।
घरेलू खतरनाक कचरे में पुरानी बैटरियां, पेंट के डिब्बे, कीटनाशक की बोतलें, ट्यूबलाइट और एक्सपायर दवाएं शामिल मानी गई हैं, जिन्हें अलग रंग के कूड़ेदान में डालना जरूरी होगा। वहीं इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे अपशिष्ट को सीधे कूड़ेदान में डालने के बजाय पहले कागज या पाउच में लपेटकर अलग से देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संक्रमण और गंदगी फैलने की संभावना कम हो सके। इस नए नियम के जरिए साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और कचरा निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।

