उत्तराखंड: आगामी केदारनाथ धाम यात्रा को इस बार पहले से अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है। रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक पूरे यात्रा मार्ग को तीसरी नजर यानी अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों से कवर किया गया है, ताकि हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा सके और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सके। जिला प्रशासन और पुलिस ने यात्रा रूट, पैदल मार्ग, मुख्य बाजारों, संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों और हेलीपैड सहित विभिन्न स्थानों पर लगभग 200 हाई रेजोल्यूशन कैमरे स्थापित किए हैं, जिनमें से 181 कैमरे रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के बीच सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे हैं।
गौरीकुंड से केदारनाथ तक के संवेदनशील पैदल मार्ग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जहां करीब 16 कैमरे लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरे मार्ग पर एसओएस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनकी मदद से नेटवर्क न होने की स्थिति में भी श्रद्धालु सीधे जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकेंगे। इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके जरिए संबंधित व्यक्ति की रियल टाइम लोकेशन ट्रेस की जा सकती है, जिससे राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए इस बार ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर चलने वाले लगभग पांच हजार घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड, टोकन और चिप लगाई जा रही है, ताकि उनकी आवाजाही और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए भी इन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जाम या भीड़ की स्थिति बनते ही पुलिस तुरंत निर्णय लेकर व्यवस्था संभाल सके।
गौरीकुंड, सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जो सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे। चारधाम यात्रा के दौरान जिला आपदा कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा, जहां तैनात कर्मी हर पल स्थिति पर नजर रखते हुए किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देंगे। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि श्रद्धालुओं को इस बार सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।

