देहरादून | उत्तराखंड एसटीएफ (STF) की साइबर क्राइम टीम ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्ग दंपति से 69 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने रुद्रपुर से मुख्य आरोपी भगवत सरन को गिरफ्तार किया है, जबकि उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।
मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखा रचा साजिश का जाल
एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ऋषिकेश के एक बुजुर्ग दंपति को निशाना बनाने के लिए शातिरों ने बेहद खौफनाक तरीका अपनाया। ठगों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए बुजुर्ग को कॉल किया और खुद को दिल्ली के दरियागंज पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर तथा दूसरे साथी ने माननीय न्यायालय का जज बताकर धमकाया।
ठगों ने दंपति को डराया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर कई अवैध सिम कार्ड लिए गए हैं, जिनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और गैर-कानूनी वित्तीय लेनदेन में हुआ है। इस जाल में फंसाकर दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया और उन्हें तब तक किसी से बात न करने का दबाव बनाया गया जब तक कि वे ठगों की मांगें पूरी नहीं कर देते।
जमीन बेचकर लुटाए पैसे
दंपति ठगों के झांसे में इस कदर आए कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी के अलावा अपनी जमीन तक बेच दी। ठगों ने संपत्ति वेरिफिकेशन, एनओसी (NOC) और अदालत से जमानत दिलाने के नाम पर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 69 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब दंपति को एहसास हुआ कि वे साइबर जालसाजों का शिकार हो चुके हैं, तो उन्होंने मामले की शिकायत की।
एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई
शिकायत मिलते ही एसटीएफ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर रुद्रपुर से भगवत सरन नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी एक गिरोह के रूप में काम कर रहे थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है।
सावधानी ही बचाव है:
एसटीएफ ने जनता से अपील की है कि:
- किसी भी अनजान व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल पर घबराएं नहीं।
- कोई भी सरकारी अधिकारी या पुलिस कभी भी व्हाट्सएप पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
- किसी भी अज्ञात व्यक्ति को बड़ी धनराशि ट्रांसफर न करें।
- साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें।

