



उत्तराखंड में इन दिनों जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य की धामी सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मोर्चा संभाले हुए हैं और समय-समय पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर हालात की निगरानी कर रहे हैं। साथ ही, जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
वन विभाग की अभिनव और हाई-टेक पहल
इसी कड़ी में पिथौरागढ़ वन विभाग ने जंगली जानवरों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक आधुनिक और तकनीकी समाधान अपनाने का फैसला किया है। विभाग अब आबादी से सटे इलाकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) से लैस कैमरे लगाने जा रहा है। ये हाई-टेक कैमरे करीब 150 मीटर की दूरी से ही जंगली जानवरों की पहचान करने में सक्षम होंगे। जैसे ही किसी वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज होगी, कैमरे से जुड़े तेज सायरन अपने आप बजने लगेंगे, जिससे जानवरों को पहले ही सचेत कर इलाके से दूर भगाया जा सकेगा।
भालू दिखते ही सक्रिय होगा सिस्टम
इतना ही नहीं, भालू जैसे खतरनाक जानवरों के नजर आते ही A.I. कैमरा ऑटोमैटिक तरीके से बियर स्प्रे का छिड़काव भी करेगा। स्प्रे की तेज गंध और असर से भालू तुरंत उस जगह से भाग जाएगा। इस तकनीक के जरिए मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
पिथौरागढ़ के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि जिन जंगलों की सीमाएं सीधे आबादी वाले इलाकों से लगती हैं और जहां अक्सर शेर, भालू जैसे वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती है, वहां इन A.I. कैमरों को प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह पहल न सिर्फ लोगों की सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि वन्यजीवों को भी सुरक्षित तरीके से जंगलों तक सीमित रखने में मदद करेगी।

