ऋषिकेश। केंद्र और उत्तराखंड सरकार के निर्बाध आपूर्ति के तमाम दावों के विपरीत, तीर्थनगरी ऋषिकेश में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। शहर में ईंधन की आपूर्ति कम होने से यातायात और स्थानीय व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। जगह-जगह पेट्रोल पंपों पर तेल के लिए वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो सरकार के विकास और सुचारू व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।
15 में से कई पंप हुए ‘ड्राई’, जहां तेल है वहां मची है अफरातफरी
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ऋषिकेश नगर क्षेत्र में कुल 15 पेट्रोल पंप संचालित हैं। ईंधन की भारी कमी के चलते इनमें से कई प्रमुख पंपों पर तेल पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिसके कारण वहां सन्नाटा पसरा हुआ है और ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लटक गए हैं। वहीं, जिन गिने-चुने पंपों पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, वहां की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है।
पंपों पर दोपहिया और चौपहिया वाहनों की इतनी लंबी कतारें हैं कि लोगों को अपनी बारी के लिए कई-कई घंटों तक भीषण गर्मी में इंतजार करना पड़ रहा है। इस संकट के बीच खास बात यह भी है कि वाहन चालकों को उनकी डिमांड के अनुसार पूरा पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है, जिससे राशनिंग जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
दामों में बेतहाशा वृद्धि और अब किल्लत से जनता बेहाल
इस प्रशासनिक और सरकारी अव्यवस्था को लेकर स्थानीय जनता और वाहन चालकों में सरकार व प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता पर चौतरफा मार पड़ रही है।
“एक तरफ तो सरकार ने पिछले महज 10 दिनों के भीतर चार बार पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर आम आदमी की कमर तोड़ दी है, और दूसरी तरफ अब बाजार से ईंधन की उपलब्धता को ही घटा दिया गया है। ऐसे में आम जनता दोहरे संकट में फंस गई है।” — व्यथित स्थानीय निवासी
रोजगार छोड़ लाइनों में खड़े रहने को मजबूर लोग
गुस्साए वाहन चालकों और स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि इस संकट ने उनके दैनिक जीवन और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है। लोगों ने सवाल उठाया है कि वे अब अपने काम-धंधे, दफ्तर और रोजगार पर ध्यान दें या फिर गाड़ियों में चंद लीटर तेल भरवाने के लिए दिनभर पेट्रोल पंपों पर कतारों में खड़े रहकर अपना समय बर्बाद करें।
तीर्थनगरी में अचानक उपजे इस ईंधन संकट ने न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की मुश्किलों को भी बढ़ा दिया है। फिलहाल, इस गंभीर किल्लत पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

