



उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने धर्म और राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर अहम विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब तक धर्म की रक्षा नहीं होगी, तब तक राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता। यह विचार उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यों पर आधारित पुस्तक ‘धर्म रक्षक धामी’ के विमोचन अवसर पर व्यक्त किए। शंकराचार्य ने पुस्तक में संकलित मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्यों में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भी राष्ट्र के सुचारू और संतुलित संचालन के लिए धर्म आधारित नीति का होना आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब धर्म सुरक्षित रहता है, तभी देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा भी मजबूत होती है। साथ ही उन्होंने जिहादी मानसिकता से उत्पन्न चुनौतियों के खिलाफ उत्तराखंड सरकार द्वारा की जा रही त्वरित और निर्णायक कार्रवाई को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया। इस विषय को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने के लिए लेखिकाओं डॉ. सोनाली मिश्रा और रीना मानसेरा के प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अन्य संतों और बुद्धिजीवियों ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि यह पुस्तक राज्य में हो रहे सकारात्मक और जनहितकारी कार्यों को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री धामी को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे, जिससे आयोजन को विशेष गरिमा प्राप्त हुई।

