



Uttarakhand: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उत्तराखंड को फल और सब्जी उत्पादन का एक वैश्विक हब बनाने की दिशा में ठोस और दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने यह बात चमोली जिले के गौचर में आयोजित राज्य स्तरीय किसान दिवस कार्यक्रम के दौरान कही। इस अवसर पर कृषि क्षेत्र को सशक्त करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई अहम योजनाओं और पहलों की घोषणा की गई।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राज्य के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली और रोग-मुक्त पौध उपलब्ध कराने के लिए मुक्तेश्वर में 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘क्लीन प्लांट सेंटर’ की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र के माध्यम से कीवी, सेब, माल्टा और नींबू जैसी महत्वपूर्ण बागवानी फसलों के उन्नत और प्रमाणित पौधे किसानों को मिल सकेंगे। इससे न केवल फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ किसानों की मेहनत का उचित प्रतिफल भी सुनिश्चित हो सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड के कृषि विकास के लिए एक व्यापक पाँच वर्षीय रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप इंटीग्रेटेड खेती को बढ़ावा देते हुए छोटे और सीमांत किसानों के खेतों से अधिक उत्पादन लेने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत फल और सब्जी उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और जड़ी-बूटी जैसी गतिविधियों को भी कृषि से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को विविध स्रोतों से आय प्राप्त हो सके।
इस योजना का एक अहम हिस्सा न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित साझेदारी भी है। केंद्र सरकार राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करेगी, जहां आधुनिक बागवानी तकनीकों, उन्नत फसल प्रबंधन और प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा। इससे उत्तराखंड की कीवी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहचान मिल सकेगी।
राज्य सरकार भी बागवानी और उद्यानिक विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सक्रिय रूप से नीतिगत कदम उठा रही है। मंडुवा, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न योजनाएं तैयार की गई हैं। इसके अलावा जापान के सहयोग से 526 करोड़ रुपये की उत्तराखंड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना को भी सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम उत्पादन और किसानों की आय में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ रहे हैं।
सरकारी स्तर पर किए जा रहे ये प्रयास न केवल प्रदेश के कृषि क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान करेंगे, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के साथ उत्तराखंड को विश्व मानचित्र पर एक प्रमुख फल और सब्जी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

