


Rishikesh: दिसंबर को ऋषिकेश में वन भूमि प्रकरण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों और कथित रूप से निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में जनप्रतिनिधियों ने तहसील प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने जिस तरह अचानक और कठोर कार्रवाई की, उससे वर्षों से उस क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों के बीच भय, तनाव और गहरा आक्रोश पैदा हो गया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों में तथ्यों की जांच के लिए समिति गठित करने और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन इसके विपरीत प्रशासन ने संवाद और संयम अपनाने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुना।
आरोप लगाया गया कि लाठीचार्ज और पथराव की घटनाओं के बाद बिना निष्पक्ष जांच के ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जिसके चलते कई निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम लोगों का प्रशासन पर से भरोसा टूट रहा है।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि 28 दिसंबर को हुई घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। इसके साथ ही सभी निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए कथित फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं और जेल में बंद लोगों की अविलंब रिहाई सुनिश्चित की जाए। जनप्रतिनिधियों ने यह भी आग्रह किया कि भविष्य में इस तरह की दमनात्मक कार्रवाई न हो, इसके लिए प्रशासन को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए जाएं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य विनीता रतूड़ी, ग्राम प्रधान शांति थपलियाल, आशुतोष शर्मा, दिनेश चंद्र मास्टर, विनोद चौहान, देवेंद्र दत्त बैलवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।







