


महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने माघ पूर्णिमा से धर्म के मार्ग से अलग होने का बड़ा और भावुक ऐलान किया है। उन्होंने यह घोषणा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो के माध्यम से की, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव, संघर्ष और भीतर चल रहे द्वंद्व को खुलकर सामने रखा। हर्षा ने कहा कि प्रयागराज के पवित्र संगम में माघ पूर्णिमा पर स्नान करने के साथ ही उनकी धार्मिक यात्रा का यह अध्याय समाप्त हो जाएगा और इसके बाद वह इस मार्ग को पूरी तरह छोड़ देंगी।

अपने वीडियो में हर्षा रिछारिया ने बताया कि महाकुंभ से शुरू हुई उनकी यह यात्रा जितनी प्रसिद्धि लेकर आई, उतना ही विरोध और कटु आलोचना भी उनके हिस्से आई। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलने के बाद लोग यह मानने लगे कि उन्होंने इससे धन और लाभ कमाया होगा, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। हर्षा के अनुसार, वह आर्थिक रूप से कर्ज में डूबी हुई हैं और लगातार बिना किसी गलती के सवालों और आरोपों का सामना कर रही हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह कोई ऐसी आदर्श स्त्री नहीं हैं, जिसे बार-बार अपनी पवित्रता और नीयत साबित करनी पड़े।
हर्षा ने यह भी बताया कि बीते एक साल में उन्हें लगातार मानसिक दबाव और विरोध झेलना पड़ा। कई बार लोगों ने यह कहकर उम्मीद बंधाई कि धर्म के रास्ते पर चलने से सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हर बार आलोचनाओं और संदेहों ने उनके मन को तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाओं को निशाना बनाना और उनके चरित्र पर सवाल उठाना सबसे आसान बना दिया जाता है, और यही अनुभव उनके लिए सबसे पीड़ादायक रहा।
वीडियो में हर्षा ने स्पष्ट किया कि धर्म के मार्ग पर रहते हुए उन्हें न तो किसी का वास्तविक समर्थन मिला और न ही सहयोग। उन्होंने कहा कि हर कदम पर उन्हें रोका गया और उनकी मंशा पर सवाल खड़े किए गए। इसी कारण उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया है कि अब वह इस राह को छोड़कर अपने पुराने पेशे और जीवन की ओर लौटेंगी।
अंत में हर्षा रिछारिया ने युवाओं को भी एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई धर्म के मार्ग पर चलना चाहता है तो सबसे पहले अपने परिवार के साथ जुड़े रहना चाहिए और अपने घर के मंदिर में ही आस्था को साधना चाहिए। बाहरी दिखावे और दूसरों की बातों में आकर जीवन के बड़े फैसले नहीं लेने चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है और इसे उनकी जिंदगी के एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

