


Dehradun: विशेष पॉक्सो अदालत ने बुधवार को एक नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के दोषी वायु सेना कर्मी को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध के लिए आरोपी को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में कहा कि अपराधी की तरह कोई भी व्यक्ति, विशेषकर जो जिम्मेदारी के पद पर हो, यदि अपने कर्तव्य से विमुख होकर मासूम का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित करता है, तो उसके प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। न्यायाधीश अर्चना सागर ने अपने फैसले में यह भी टिप्पणी की कि जिस पिता की जिम्मेदारी अपनी बेटी की रक्षा करना है, वही पिता यदि उसकी मासूमियत का शोषण करता है, तो यह समाज और कानून दोनों के लिए अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
फैसले में अदालत ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत को पीड़िता ने बताया कि जब वह महज पांच-छह साल की थी, तभी से उसके पिता ने उसका यौन शोषण शुरू कर दिया था। उसने बताया कि उसके पिता उसे चुप रहने के लिए उसकी गुड़िया के हाथ-पैर तोड़ देते थे और धमकी देते थे कि यदि किसी को बताया तो उसके साथ भी यही होगा। पिता ने उसे यह भी समझाया कि हर पिता अपनी बेटी से ऐसे ही प्यार करता है, इसलिए वह किसी को कुछ मत बताना।
सालों तक अत्याचार सहने के बाद, पीड़िता ने नवंबर 2023 में हिम्मत जुटाकर अपने पिता को सारी सच्चाई बताई। इसके कुछ दिनों बाद, 20 नवंबर को जब आरोपी ने फिर से उसकी मासूमियत को तार-तार करने की कोशिश की, तो उसकी मां ने उसकी मदद के लिए पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारी के डर से भागने पर मजबूर किया, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है, और ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

