


उत्तराखंड की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण और आम जनता से जुड़े निर्णय लिए गए, जो सामाजिक न्याय, आर्थिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। इस बैठक में सबसे अहम फैसला उपनल (UPNL) कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का रहा। इसके तहत ऐसे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जिन्होंने लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक सेवा पूरी की है। सरकार ने इसे एक चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि कर्मचारियों को उनके योगदान के अनुसार न्यायसंगत वेतन और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस फैसले से पूर्व सैनिक कल्याण निगम से जुड़े हजारों कर्मचारियों को वित्तीय और सामाजिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट ने कर्मचारियों के वेतन, सेवा और अन्य लाभों पर बनी सब-कमेटी की सिफारिशों को भी मंजूरी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में सेवा कर रहे कर्मचारियों को भी चरणबद्ध तरीके से समान वेतन का लाभ दिया जाएगा, जिससे कार्यस्थल पर समानता और न्याय की भावना मजबूत हो।
बैठक में न्यायिक सुधारों को भी विशेष महत्व दिया गया। इसके तहत प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जिलों में 16 नए विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए कुल 144 पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश के विज्ञान केंद्र और हिंदी अध्ययन केंद्रों में भी कई नए पद स्वीकृत किए गए हैं, ताकि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में क्षमता और कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सके।
सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) में आवश्यक संशोधनों को लागू करने की मंजूरी भी दी है, ताकि इसमें मौजूद तकनीकी और भाषाई खामियों को दूर किया जा सके और इसे सुचारू रूप से लागू किया जा सके। इसके अलावा खेल महाकुंभ प्रतियोगिताओं में विजेताओं के लिए पुरस्कार राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे खेल और युवा गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए नई होम स्टे एवं बेड‑एंड‑ब्रेकफास्ट नियमावली‑2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य के स्थानीय निवासियों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किफायती और सुरक्षित ठहरने की सुविधा प्राप्त होगी।
इन फैसलों के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह सामाजिक न्याय, रोजगार सृजन, नागरिक कल्याण और प्रशासनिक सुधार को समान रूप से प्राथमिकता दे रही है। राज्य में आर्थिक, न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों के इन कदमों से नागरिकों के जीवन में स्थायीत्व और सुरक्षा बढ़ेगी और शासन‑प्रशासन की कार्यक्षमता और पारदर्शिता में सुधार आएगा।

