

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश की सड़कों पर अब पैदल चलना भी दूभर हो गया है। शहर में आवारा सांडों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि राहगीरों को हर पल अपनी जान का खतरा सता रहा है। रविवार सुबह पुराने टिहरी बस स्टैंड पर दो सांडों के बीच हुई भीषण लड़ाई ने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी, जिससे न केवल वाहनों को नुकसान पहुँचा, बल्कि एक गरीब की रोजी-रोटी पर भी लात पड़ गई।
सड़क बनी जंग का मैदान, लोग जान बचाकर भागे
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह-सुबह पुराने टिहरी बस स्टैंड के पास दो भारी-भरकम सांड आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच लड़ाई इतनी हिंसक थी कि वहां खड़ी कई गाड़ियां उनकी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। इसी दौरान फुटपाथ पर खाने की ठेली लगाकर अपना गुजारा करने वाले एक युवक की ठेली को सांडों ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे ठेली पलट गई और युवक का सारा भोजन जमीन पर बिखर गया। बेचारा युवक अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद होते देखता रहा, लेकिन सांडों के खौफ से पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
लाठी-डंडे और पानी भी रहे बेअसर
स्थानीय लोगों ने सांडों को अलग करने के लिए उन पर लाठियां भांजी और पानी की बौछारें भी कीं, लेकिन सांडों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। काफी देर तक चले इस ‘खूनी खेल’ के बाद जब सांड दूसरे क्षेत्र की ओर भागे, तब जाकर व्यापारियों और राहगीरों ने राहत की सांस ली।
तीन दिन पहले महिला को हवा में उछाला
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। महज तीन दिन पहले शिवाजी नगर में एक सांड ने सड़क पर चल रही महिला को टक्कर मारकर कई फीट हवा में उछाल दिया था। शहर के लगभग हर कोने में आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
नगर निगम के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा
इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों ने नगर निगम और पशु कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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- स्थानीय निवासियों का कहना है: “नगर निगम सो रहा है और हम सड़कों पर मरने को मजबूर हैं। लाखों का बजट आता है, लेकिन सांडों को गौशाला भेजने का कोई इंतजाम नहीं है।”
- आंदोलन की चेतावनी: उग्र लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों से आवारा सांडों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर नहीं भेजा गया, तो वे नगर निगम के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? गरीब की टूटती ठेली और चोटिल होते राहगीरों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?







