

उत्तराखंड में नदियों के किनारे बसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों को एक नई पहचान देने की दिशा में सरकार ने बड़ा विजन तैयार किया है। गंगा और शारदा नदी के तटों को विकसित कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस पहल के तहत ऋषिकेश, हरिद्वार से लेकर टनकपुर तक तीन प्रमुख रिवरफ्रंट विकसित किए जाएंगे, जो आस्था, पर्यटन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का संगम बनेंगे।
इस परियोजना का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी किनारे के क्षेत्रों को व्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाना भी है। घाटों का पुनर्विकास किया जाएगा, जहां बेहतर सुविधाएं, साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था और सुगम आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पैदल पथ, पार्किंग, लाइटिंग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को भी आधुनिक रूप दिया जाएगा, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक सहज अनुभव कर सकें।
शारदा नदी के किनारे टनकपुर क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्य इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां बड़े स्तर पर आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। यहां ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के साथ-साथ हेलीपैड जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जाएगा, जिससे आपातकालीन सेवाएं और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी योजना है, ताकि यह क्षेत्र केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि रोमांचक पर्यटन का भी केंद्र बन सके।
गंगा तट पर ऋषिकेश और हरिद्वार में भी इसी तर्ज पर रिवरफ्रंट विकसित किए जाएंगे, जहां पारंपरिक धार्मिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस पूरी योजना के माध्यम से सरकार एक ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहती है, जिसमें आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और विकास एक साथ दिखाई दें।
यह परियोजना न केवल पर्यटन को नई गति देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। कुल मिलाकर, यह पहल उत्तराखंड के नदी तटों को एक नए







