


देहरादून: अर्जुन शर्मा हत्याकांड में अब एक नया नाम सामने आया है। इस मामले में शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर अजय खन्ना की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। पूरी कहानी गैस एजेंसी के लोन और संपत्ति बेचने के विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। अमरदीप गैस एजेंसी अर्जुन के पिता के शहीद होने के बाद सरकार की ओर से परिवार को मिली थी। यह एजेंसी अर्जुन की मां के नाम पर थी। एजेंसी चलाने के लिए बैंक से लोन लिया गया था। इसके अलावा अर्जुन की मां ने इसी संपत्ति को बैंक में गिरवी रखकर कुछ और लोन भी ले लिया था।

कुछ समय बाद अर्जुन की मां इस संपत्ति और एजेंसी को बेचना चाहती थी। जब अर्जुन को इसकी जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध किया। अर्जुन नहीं चाहता था कि उनके पिता की विरासत में मिली गैस एजेंसी बेची जाए। उसने इस बारे में बैंक में शिकायत भी कर दी। बैंक को जब पता चला कि गिरवी रखी गई संपत्ति को बेचने की कोशिश हो रही है, तो बैंक ने इस पर आपत्ति लगा दी और रोक लगा दी।
इसके बाद इस कहानी में शहर के नामी डॉक्टर अजय खन्ना की एंट्री हुई। बताया जा रहा है कि अर्जुन की मां के कहने पर डॉक्टर अजय खन्ना और उनके साथियों ने गैस एजेंसी से जुड़ा पूरा लोन चुका दिया। लोन चुकाने के बाद बैंक की ओर से संपत्ति पूरी तरह मुक्त हो गई और बैंक का उस पर कोई अधिकार नहीं रहा।

यह संपत्ति शहर की बहुत अच्छी और कीमती जगह पर स्थित है, जहां दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जा सकती थीं और ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता था। इसी वजह से इस संपत्ति पर कुछ और लोगों की भी नजर थी। लेकिन इस पूरी योजना में सबसे बड़ी रुकावट अर्जुन था, जो किसी भी हालत में गैस एजेंसी को बंद नहीं होने देना चाहता था।
पुलिस के अनुसार, इसी उलझे हुए विवाद में किसी एक पक्ष ने भाड़े के शूटरों को बुलाकर अर्जुन की हत्या करवा दी। इस मामले में परिवार के अंदर चल रहे झगड़े और आपसी दुश्मनी भी सामने आई है। हालात ऐसे बन गए थे कि मां और बेटा एक-दूसरे के खिलाफ कोर्ट तक पहुंच गए थे और कई मामले हाईकोर्ट में भी चल रहे थे।
फिलहाल पुलिस की जांच में गैस एजेंसी और संपत्ति विवाद ही सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। पुलिस इसी आधार पर पूरी साजिश की परतें खोलने की कोशिश कर रही है और यह पता लगा रही है कि हत्या की योजना किसने बनाई और इसमें कौन-कौन शामिल था।







