


उत्तराखंड: शिलगांव खत के हरटाड़ गांव के समीप उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सिविल सोयम (राजस्व विभाग के अधीन) के जंगल में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के इलाकों तक फैल गई। जंगल से भड़की इस आग की चपेट में आकर हरटाड़ गांव के दस ग्रामीण किसानों के सेब के बगीचे पूरी तरह जलकर राख हो गए। इस भीषण हादसे में करीब 1200 सेब के पेड़ नष्ट हो गए, जिससे किसानों को लाखों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
कथियान क्षेत्र के हरटाड़ गांव निवासी कृषक काना सिंह, जगत सिंह, दिनेश, जयेंद्र सिंह, महेंद्र, प्रमोद, सूरत सिंह, नरेश, पातीराम और मनवीर के खेड़ा मानवा और शयलाड़ क्षेत्र में सेब के बगीचे हैं। बुधवार को बगीचों से सटे सिविल सोयम के जंगल में अचानक आग लग गई, जो तेज हवा और सूखे मौसम के कारण तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही समय में आग ने किसानों के सेब के बगीचों को अपनी चपेट में ले लिया और वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए सैकड़ों फलदार पेड़ जलकर खाक हो गए।
आग की लपटों से काना सिंह की दो मंजिला छानी भी नहीं बच सकी और वह पूरी तरह जलकर राख हो गई। इस घटना ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बागवानी पर निर्भर इन परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि सेब की खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन थी। बगीचों के नष्ट होने से न केवल मौजूदा नुकसान हुआ है, बल्कि आने वाले कई वर्षों की कमाई भी प्रभावित हो गई है।
घटना के बाद प्रभावित किसानों ने शासन और प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। वहीं नायब तहसीलदार सरदार सिंह राणा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक से नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है, ताकि आगे की राहत और मुआवजा प्रक्रिया को शुरू किया जा सके।

