



ऋषिकेश के निकट अमित ग्राम गली नंबर 25 में करीब 30 बीघा भूमि पर एक ऐसा आदेश पारित हुआ है जिसने 50 साल से भूमि पर काबिज 25 परिवार के लोगों की नींद उड़ा दी है। उजड़ने की डर से भयभीत लोगों ने भूमि पर बसे रहने का हक देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
पूर्णानंद बहुगुणा ने बताया कि अमित ग्राम गली नंबर 25 में करीब 30 बीघा भूमि पर 25 परिवार 50 साल से काबिज है। आठ परिवारों ने अपना मकान बना लिया है। जबकि बाकी परिवार भूमि पर समय-समय पर खेती करने का काम करते हैं। यह वन भूमि पहले वीरभद्र सामूहिक सहकारी खेती समिति बापू ग्राम के पास थी। जो 23 अक्टूबर 1984 को वन विभाग को सौंप दी गई थी। इसके प्रमाण पत्र उनके पास मौजूद है। इस भूमि पर कुछ लोगों ने कूट रचित तरीके से दस्तावेज तैयार कर विवाद किया जा रहा है।
इस मामले के बाबत उपजिला मजिस्ट्रेट ऋषिकेश ने उनकी सुनवाई के बगैर एक तरफा फैसला विवाद करने वाले पक्ष में सुनाया है। इस फैसले के तहत 26 अक्टूबर 2025 को पुलिस बल की मौजूदगी में भूमि परिवारों से खाली कराई जानी है। आरोप लगाया कि मामले में उप जिला मजिस्ट्रेट ने उनकी सुनवाई नही करी है। इस कारण परिवार के लोगों का दिन का चैन छिन गया और रात की नींद उड़ गई है। लोगों ने कार्रवाई से पहले उनका पक्ष जानने के बाद फैसला देने की मांग की है।
अनीता कंडवाल ने बताया कि भूमि खाली कराने को लेकर 11 जून 2024 को जिला मजिस्ट्रेट ऋषिकेश के द्वारा पहले भी आदेश जारी किया गया। इस आदेश के खिलाफ मामला उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया है जो की लंबित है। बताया कि यह भूमि वन विभाग की है और वन विभाग ने माना है कि कब्जाधारी अतिक्रमणकारी है। जबकि राजस्व विभाग भी लिखित रूप से जानकारी दे चुका है कि यह भूमि वन विभाग की ही है।
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि वन विभाग की भूमि को कैसे आदेश देकर किसी के पक्ष में खाली कराया जा सकता है।

