

उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं। इन निर्णयों का उद्देश्य जहां एक ओर विकास परियोजनाओं को गति देना है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और नीतिगत पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करना है।

कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में भूमि खरीद नीति में बड़ा बदलाव शामिल है। अब सरकारी विभागों को विकास कार्यों के लिए जमीन लेने के लिए लंबी और जटिल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सरकार और भूमि स्वामियों के बीच आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन खरीदी जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भूमि मालिकों को भी उचित और संतोषजनक मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी। लंबे समय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों और न्यायालयी मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है।
राज्य में भूमिगत जल के संरक्षण को लेकर भी सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब उत्तराखंड में भूजल के व्यावसायिक उपयोग पर शुल्क देना अनिवार्य होगा। औद्योगिक इकाइयों, आवासीय सोसाइटी, मिनरल वाटर, कोल्ड ड्रिंक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले भूजल के लिए पंजीकरण शुल्क के साथ-साथ उपयोग के अनुसार प्रति किलोलीटर शुल्क तय किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे जल संसाधनों का अनियंत्रित दोहन रुकेगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक विकास से जुड़े एक अन्य फैसले में ऊधम सिंह नगर स्थित पराग फार्म की वह भूमि, जो पहले सिडकुल को आवंटित की गई थी, को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। इस भूमि को न तो बेचा जा सकेगा और न ही सामान्य रूप से पट्टे पर दिया जाएगा, लेकिन सिडकुल को समान उद्देश्य के लिए सब-लीज देने की अनुमति होगी। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और भूमि का उपयोग नियोजित ढंग से हो सकेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में कैबिनेट ने उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत जीआरडी को उत्तराखंड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान मिलेगी और युवाओं के लिए बेहतर शैक्षणिक व रोजगारोन्मुख अवसर उपलब्ध होंगे। इस संबंध में आगामी बजट सत्र में विधानसभा में अध्यादेश लाया जाएगा।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े फैसले में चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से रक्षा मंत्रालय को सौंपने पर सहमति बनी है। इन हवाई पट्टियों का संयुक्त संचालन होने से सामरिक और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से राज्य को मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा और सब्सिडी से जुड़े फैसले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लिए जाएंगे। सरकार का दावा है कि यह नीति उत्तराखंड को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार करेगी और निवेशकों को भी आकर्षित करेगी।
कुल मिलाकर, धामी कैबिनेट के ये फैसले भूमि, जल, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे अहम क्षेत्रों में संतुलित विकास की दिशा में एक मजबूत कदम माने जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन नीतिगत निर्णयों से राज्य के समग्र विकास को नई गति मिलेगी और उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।







