


ऋषिकेश में सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और उन्हें मिलने वाले सरकारी लाभों को लेकर बुधवार को नगर निगम सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने की। इस दौरान नगर निगम के अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि और सफाई कर्मचारियों के संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे। बैठक में सफाई कर्मियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों पर गंभीरता से चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।
उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने कहा कि नगर निगम में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने दो कर्मचारियों की लंबित एसीपी से संबंधित पत्रावलियों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए। साथ ही नालों और नालियों की सफाई में लगे नाला गैंग का दोबारा सर्वे कराने और मैन्युअल स्कैवेंजर्स, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप से कार्यरत सभी सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी को भी निर्देश दिए गए कि समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ सफाई कर्मचारियों तक समय पर पहुंचाया जाए। विशेष रूप से पर्यावरण मित्रों के लिए बैंक लोन की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया गया। इस संबंध में 70 कर्मचारियों की सूची बैंक को भेजी गई। बैठक में बैंक अधिकारी के अनुपस्थित रहने और समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने पर उनसे स्पष्टीकरण मांगे जाने के निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान जल संस्थान द्वारा बिना सुरक्षा उपकरण के सफाई कर्मचारियों को गटर में उतारने की शिकायत सामने आई। इस पर उपाध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जल संस्थान के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने और उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के निर्देश दिए। वहीं डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण में लगे हेल्पर कर्मचारियों को दिए जा रहे 482 रुपये प्रतिदिन के मानदेय को शासनादेश के अनुसार 500 रुपये प्रतिदिन किए जाने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में सफाई कर्मचारियों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और मांगें खुलकर रखीं। उन्होंने वेतन, मानदेय, सुरक्षा उपकरण और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल, सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट सहित अन्य अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य साफ था, सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना, उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य वातावरण देना और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक बिना किसी बाधा के पहुंचाना।







